इसके अलावा, बंटवारे के दौरान अन्य अजीब मांगें भी सामने आईं। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान ने सिंध प्रांत से भेजे गए 11 हजार टन चावल को वापस करने की मांग की, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि वह चावल पहले ही उपयोग हो चुका था। साथ ही, संपत्ति के बंटवारे में नकदी, सिक्के, स्वर्ण भंडार, रेलवे स्टॉक, और यहाँ तक कि सरकारी कार्यालयों की मेज-कुर्सियाँ, झाड़ू, और टाइपराइटर जैसी चीजें भी 80:20 के अनुपात में बांटी गईं।
कुछ अन्य रोचक मांगों में पुस्तकालय की किताबों का बंटवारा भी शामिल था, जहाँ विवाद इतना बढ़ा कि कुछ किताबें, जैसे शब्दकोश, दो हिस्सों में बाँट दी गईं। बंटवारे की प्रक्रिया में कई बार तर्क और भावनाएँ आपस में टकराईं, जिसके कारण ऐसी अजीबोगरीब मांगें सामने आईं।
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ताजमहल पर हमारा हक, तोड़कर भिजवा दो पाकिस्तान…बंटवारे में भारत से मांगी अजब-गजब चीजें

नई दिल्ली। 1947 के भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान, संपत्ति और संसाधनों का विभाजन एक जटिल और विवादास्पद प्रक्रिया थी। इस दौरान कुछ असामान्य और अजीब मांगें भी सामने आई थीं, जिनमें से एक थी ताजमहल को लेकर। कुछ पाकिस्तानी कट्टरपंथी मौलानाओं ने दावा किया कि ताजमहल, जो मुगल बादशाह शाहजहां ने बनवाया था, एक इस्लामी स्मारक है और इसे तोड़कर पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए। यह मांग अव्यवहारिक और अतार्किक थी, क्योंकि ताजमहल न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी है। भारत ने इस मांग को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया।
