थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवादित मंदिर क्षेत्र, विशेष रूप से प्रासात ता मुएन थॉम और प्रीह विहियर मंदिर के आसपास, 24 जुलाई 2025 को हुई गोलीबारी ने तनाव को बढ़ा दिया। यह विवाद दशकों पुराना है, जिसकी जड़ें औपनिवेशिक काल में फ्रांस द्वारा खींची गई सीमा रेखाओं में हैं। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा माना, लेकिन आसपास की सीमाएं अस्पष्ट रहीं, जिससे तनाव बना रहा।
हालिया घटनाक्रम:
गोलीबारी की शुरुआत: थाई सेना का दावा है कि कंबोडियाई सैनिकों ने ता मुएन थॉम मंदिर के पास, थाईलैंड के सुरिन प्रांत में, एक निगरानी ड्रोन भेजकर और भारी हथियारों के साथ गोलीबारी शुरू की। कंबोडिया ने इसे खारिज करते हुए कहा कि थाई सैनिकों ने पहले हमला किया, और उनकी सेना ने आत्मरक्षा में जवाब दिया
हवाई हमले: थाईलैंड ने F-16 लड़ाकू विमानों से कंबोडिया के दो सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसमें कंबोडिया के दो क्षेत्रीय सैन्य मुख्यालय नष्ट होने का दावा किया गया। कंबोडिया ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
हानि: गोलीबारी में कम से कम दो थाई सैनिक घायल हुए, और कुछ रिपोर्ट्स में दो थाई नागरिकों की मौत की बात कही गई। कंबोडिया ने हताहतों की पुष्टि नहीं की।
राजनयिक तनाव: दोनों देशों ने अपने राजदूतों को वापस बुला लिया। थाईलैंड ने कंबोडियाई राजदूत को निष्कासित किया, और कंबोडिया ने राजनयिक संबंधों को न्यूनतम स्तर पर लाने की घोषणा की।
विवाद का कारण:
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: प्रीह विहियर और ता मुएन थॉम जैसे मंदिर खमेर-हिंदू विरासत का हिस्सा हैं। 2008 में प्रीह विहियर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने के बाद तनाव बढ़ा, क्योंकि थाईलैंड ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला माना।
हालिया उकसावे: मई 2025 में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत और हाल के बारूदी सुरंग विस्फोटों, जिनमें थाई सैनिक घायल हुए, ने तनाव को और बढ़ाया। थाईलैंड का आरोप है कि कंबोडिया ने हाल ही में नई बारूदी सुरंगें बिछाईं, जबकि कंबोडिया का कहना है कि ये पुरानी सुरंगें हैं।

