तालाब में मिली 5 लाशें, अंधविश्वास के चलते दिया गया वारदात को अंजाम
डायन बिसाही बता परिवार पर टूट पड़े गांव वाले
पटना/पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में 6 जुलाई 2025 की रात अंधविश्वास के चलते एक आदिवासी परिवार के पांच सदस्यों को डायन-बिसाही के आरोप में पीट-पीटकर और जिंदा जलाकर मार डाला गया। इस जघन्य घटना में तीन महिलाओं और दो पुरुषों की जान गई। मृतकों में सातो देवी, सीता देवी, और उनके परिवार के अन्य सदस्य शामिल थे। गांव वालों को शक था कि यह परिवार टोना-टोटका और बलि देता है, जिसके कारण गांव में बच्चों की मौत और बीमारियां हो रही थीं। पंचायत ने इस परिवार को दोषी ठहराया, और 200-250 लोगों की भीड़ ने मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया। शवों को गांव से 2 किमी दूर तालाब के पास दफनाया गया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने बरामद किया।
पुलिस ने तीन आरोपियों, जिनमें एक नाबालिग और गांव के प्रधान नकुल उरांव शामिल हैं, को गिरफ्तार किया है। 23 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, और विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) गठित किया गया है। पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार ने पीड़ित परिवार को सरकारी मदद और मुआवजे का आश्वासन दिया है। इस घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था और अंधविश्वास पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गांव में दहशत का माहौल है, और कई ग्रामीण फरार हैं।

