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वैभव सूर्यवंशी को युवराज सिंह से लेनी चाहिए ट्रेनिंग : योगराज सिंह

भारत के पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह का मानना है कि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अपने खेल में और निखार लाने के लिए युवराज सिंह की देखरेख में ट्रेनिंग लेनी चाहिए। योगराज का कहना है कि वैभव असाधारण प्रतिभा के धनी हैं और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को उन्हें लंबे समय की योजना के तहत ग्रूम करना चाहिए। योगराज सिंह के मुताबिक, 15 साल की उम्र में किसी खिलाड़ी के सामने तकनीकी कमियां आना स्वाभाविक है। ऐसे में उसकी आलोचना करने के बजाय उसे सही दिशा में तैयार करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह माता-पिता अपने 15 साल के बच्चे को भविष्य के लिए तैयार करते हैं, उसी तरह बीसीसीआई को भी वैभव सूर्यवंशी को नर्चर करना चाहिए, ताकि आने वाले वर्षों में वह भारतीय क्रिकेट की बड़ी ताकत बन सकें।

 

शॉर्ट बॉल से निपटने का बताया तरीका

 

हाल के मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी शॉर्ट गेंदों के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए हैं। इस पर योगराज सिंह ने कहा कि इस कमजोरी को दूर करने के लिए विशेष अभ्यास की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जब वह युवराज सिंह को ट्रेनिंग देते थे, तब सीमेंटेड पिच पर प्लास्टिक की गेंद से अभ्यास कराया जाता था. इसके अलावा बॉलिंग मशीन की रफ्तार 100 मील प्रति घंटा (करीब 160 किमी प्रति घंटा) तक रखी जाती थी, ताकि तेज गति की गेंदों का सामना करने की आदत विकसित हो सके।

योगराज के अनुसार, इसी कठिन अभ्यास का परिणाम था कि युवराज सिंह अपने दौर के बेहतरीन हुक और पुल शॉट खेलने वाले बल्लेबाज बने। उन्होंने याद किया कि केन्या में खेली गई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के शुरुआती दौर में भी युवराज ने फ्रंट फुट पर आकर तेज गेंदबाज़ों के खिलाफ शानदार हुक और पुल शॉट खेले थे और कभी असहज नहीं दिखे। उनका मानना है कि अगर वैभव सूर्यवंशी भी इसी तरह का अभ्यास करें, तो शॉर्ट बॉल के खिलाफ उनकी कमजोरी जल्द ही ताकत में बदल सकती है।

 

हर गेंद पर चौका-छक्का लगाने की जरूरत नहीं

 

योगराज सिंह ने वैभव सूर्यवंशी को संयम से बल्लेबाज़ी करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि क्रिकेट हर गेंद पर चौका या छक्का लगाने का खेल नहीं है। अगर बल्लेबाज हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश करेगा, तो गेंदबाज़ को उसे आउट करने के लिए सिर्फ एक अच्छी गेंद की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि यदि गेंदबाज लगातार शॉर्ट गेंद डाल रहा है, तो उन्हें छोड़ना भी एक विकल्प है. दो गेंद छोड़ देने से कुछ नहीं बिगड़ता, क्योंकि बाकी गेंदों पर रन बनाए जा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धैर्य और सही शॉट का चयन उतना ही महत्वपूर्ण है, जितनी आक्रामक बल्लेबाजी।

 

अभिषेक शर्मा को भी दी अहम सलाह

 

योगराज सिंह ने भारतीय सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा के हालिया प्रदर्शन पर भी अपनी राय रखी. इंग्लैंड और जिम्बाब्वे दौरे पर अभिषेक उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। इस पर योगराज ने कहा कि आधुनिक बल्लेबाज़ों को सिर्फ बड़े शॉट लगाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि मजबूत डिफेंस भी विकसित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक चतुर बल्लेबाज़ वही होता है, जो चौका-छक्का लगाने के बाद आसानी से सिंगल भी निकाल सके और परिस्थितियों के अनुसार अपनी बल्लेबाज़ी में बदलाव कर सके।

 

महान बल्लेबाज़ों का दिया उदाहरण

 

योगराज सिंह ने अपनी बात को समझाने के लिए वेस्टइंडीज़ के महान बल्लेबाज़ एल्विन कालीचरण का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जब कालीचरण ने 187 रन की पारी खेली थी, तब लोगों ने उनके शानदार शॉट्स की तारीफ की। हालांकि, कालीचरण ने कहा था कि उनके शॉट्स से ज्यादा चर्चा उन गेंदों की होनी चाहिए, जिन्हें उन्होंने बेहतरीन तरीके से डिफेंड किया।

योगराज ने सर गारफील्ड सोबर्स का भी उदाहरण देते हुए कहा कि महान बल्लेबाज़ वही होता है, जो मुश्किल गेंदों का सम्मान करना जानता हो। उनके अनुसार, बड़े शॉट खेलना महत्वपूर्ण है, लेकिन सही समय पर गेंद को छोड़ना और डिफेंड करना उससे भी अधिक जरूरी है।

योगराज सिंह का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा जैसे युवा खिलाड़ियों के पास अपार प्रतिभा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार सफलता पाने के लिए तकनीक, धैर्य और मैच की परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाज़ी करना सीखना बेहद जरूरी है।

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