नवंबर तक की ताजा स्थिति को देखते हुए अमेरिका के चीन पर बेतहासा टैरिफ लगाने पर शुरुआती झटका लगा, लेकिन हालिया डील से राहत मिली है, जबकि भारत खुद अमेरिकी टैरिफ की चपेट में है।
अमेरिका के टैरिफ ने चीन को कैसे प्रभावित किया?
शुरुआती मार अमेरिका ने 1 नवंबर से चीनी सामानों पर अतिरिक्त 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे कुल टैरिफ कुछ सेक्टर्स में 130% तक पहुँच गया। यह फेंटेनिल (नशीली दवा) से जुड़े मुद्दों और दुर्लभ मिट्टी (रेर अर्थ) निर्यात पर चीनी प्रतिबंधों का जवाब था। इससे चीनी निर्यात अमेरिका में महँगे हो गए, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, खिलौने और रसायन उद्योग में। 2025 की पहली छमाही में ही अमेरिका के रासायनिक आयात में चीन का हिस्सा तेजी से गिरा।
असर: चीनी निर्यातक अमेरिकी बाजार खो रहे थे, क्योंकि उत्पादों की कीमतें 30-50% बढ़ गईं। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में बदलाव आया, और चीन ने उभरते बाजारों (जैसे भारत और अफ्रीका) की ओर रुख किया – भारत को निर्यात 12.9% बढ़ा।
ताजा अपडेट (नवंबर 2025): 7 नवंबर को अमेरिका-चीन डील हुई, जिसमें अमेरिका ने फेंटेनिल टैरिफ 20% से घटाकर 10% किया, और पारस्परिक टैरिफ (reciprocal) को 10% पर रखा (125% से कम)। चीन ने भी मार्च 2025 से लगाए गए जवाबी टैरिफ हटा लिए। 10 नवंबर को प्लान्ड 10% अतिरिक्त बढ़ोतरी रद्द हो गई। अब चीनी सामानों पर कुल टैरिफ औसतन 47% है, जो पहले से राहत है। लेकिन सेक्शन 301 टैरिफ (7.5-100%) बने रहेंगे।
क्या भारत के लिए चांस बना?
शुरुआती अवसर: अक्टूबर की घोषणा से भारतीय निर्यातकों को फायदा हुआ। 2024-25 में भारत का अमेरिका को निर्यात $86 अरब था (कुल निर्यात का 18%)। टेक्सटाइल, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स और ईवी पार्ट्स में माँग बढ़ी, क्योंकि चीनी सामान महँगे हुए। FIEO के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने कहा कि इससे “ह्यूज एक्सपोर्ट ऑपर्च्युनिटी” बनेगी। खिलौना निर्यातक मनु गुप्ता ने बताया कि अमेरिकी खरीदार (जैसे टारगेट) अब भारत की ओर रुख कर रहे हैं। GTRI थिंक टैंक के अनुसार, ईवी और सेमीकंडक्टर पार्ट्स के दाम बढ़ने से भारत को फायदा।
वर्तमान चुनौतियाँ: लेकिन अब स्थिति उलट है। नवंबर 2025 तक भारत के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ 50% हो गया (चीनी के 47% से ज्यादा), क्योंकि भारत ने रूसी तेल खरीदा। ट्रंप प्रशासन ने इसे “सजा” के रूप में दोगुना कर दिया – 10% बेसलाइन + 25% पारस्परिक + 15% अतिरिक्त। इससे भारतीय निर्यात प्रभावित हो रहा है, खासकर रसायन और मैन्युफैक्चरिंग में।
भारत की प्रतिक्रिया: भारत ने मॉस्को को ट्रेड डेलिगेशन भेजा है, ताकि रूसी बाजारों पर निर्भरता बढ़े। साथ ही, अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बात चल रही है, जो टैरिफ कम कर सकता है। रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क (10 साल का) से तकनीकी सहयोग बढ़ेगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
पहलूचीन पर असर भारत के लिए अवसर/जोखिम टैरिफ दर47% (डील के बाद राहत)50% (रूसी तेल के कारण दंड)प्रभावित सेक्टरइलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, ईवी (गिरावट)टेक्सटाइल, खिलौने (अवसर), लेकिन कुल निर्यात हनी वैश्विक शिफ्ट उभरते बाजारों (भारत+अफ्रीका) की ओर अमेरिकी बाजार में जगह, लेकिन चीन+रूस पर निर्भरता बढ़ेगीविशेषज्ञ दृष्टि”होस्टाइल” कदम से निर्यात 20-30% गिरा”लेवल प्लेइंग फील्ड” लेकिन क्षमता बढ़ानी होगी

