उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास और चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) को ‘पनौती’ (दुर्भाग्यशाली) कहकर एक विवादास्पद बयान दिया, जिससे बीजेपी-रालोद गठबंधन में तनाव पैदा हो गया। इस बयान की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची है, और रालोद नेताओं ने मंत्री को हटाने की मांग की है। यह विवाद मथुरा की छाता विधानसभा सीट पर वर्चस्व की जंग से जुड़ा है, जो इस मामले का मुख्य केंद्र है।
बयान का विवाद
चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि रालोद के साथ गठबंधन के कारण बीजेपी को 2024 के लोकसभा चुनाव में नुकसान हुआ, और उनकी सीटें 400 के लक्ष्य से घटकर 240 रह गईं। उन्होंने रालोद को ‘पटपांव’ बताते हुए दावा किया कि यह पार्टी जिसके साथ जाती है, उसका ‘सूपड़ा साफ’ हो जाता है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि रालोद के गठबंधन से चंद्रशेखर, वी.पी. सिंह, नरसिम्हा राव, और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकारें प्रभावित हुईं। इस बयान पर रालोद ने तीखी प्रतिक्रिया दी, और इसके नेताओं ने इसे निराधार और अनुचित बताया। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव अनिल दुबे ने कहा कि लक्ष्मीनारायण को गन्ना किसानों की चिंता करनी चाहिए, न कि गठबंधन पर टिप्पणी।
छाता सीट और वर्चस्व की जंग
छाता विधानसभा सीट मथुरा जिले में है और जाट-क्षत्रिय बिरादरी के वर्चस्व वाली सीट रही है। 1993 से इस सीट पर चौधरी लक्ष्मीनारायण (बीजेपी) और तेजपाल सिंह (रालोद) के बीच लगातार प्रतिस्पर्धा रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में लक्ष्मीनारायण ने तेजपाल सिंह को 49,000 वोटों से हराया। लेकिन 2024 में रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद, रालोद नेता तेजपाल सिंह ने दावा किया कि पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी ने छाता सीट को रालोद के खाते में लेने की बात कही है, और उनके बेटे वहां से चुनाव लड़ सकते हैं। इस बयान ने लक्ष्मीनारायण को उकसाया, जिन्हें लगता है कि रालोद उनकी सीट पर दावा कर रहा है।
सियासी तनाव
लक्ष्मीनारायण का बयान छाता सीट पर बीजेपी और रालोद के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। रालोद के एनडीए में शामिल होने के बाद जयंत चौधरी को केंद्रीय मंत्री बनाया गया, जिससे उनकी सियासी ताकत बढ़ी। लेकिन लक्ष्मीनारायण, जो जाट समुदाय के प्रमुख नेता हैं, का मानना है कि जाट वोटर बीजेपी के साथ हैं, न कि रालोद के। उन्होंने दावा किया कि रालोद का वोटर बीजेपी को वोट नहीं देता। इस विवाद ने गठबंधन की एकता पर सवाल उठाए हैं, और रालोद नेताओं ने योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर लक्ष्मीनारायण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।







