अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने संबोधन के दौरान ब्रिटेन की राजधानी लंदन पर निशाना साधा। उन्होंने लंदन के मेयर सादिक खान को ‘भयानक मेयर’ बताते हुए दावा किया कि शहर ‘शरिया कानून’ की ओर बढ़ रहा है। यह बयान ट्रंप और खान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को नई ऊंचाई दे रहा है, जिसमें खान के कार्यालय ने इसे ‘भेदभावपूर्ण और घृणास्पद’ करार दिया है। साथ ही, ब्रिटिश मुस्लिम संगठनों ने भी ट्रंप की टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया है।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने अपने भाषण में यूरोप की आप्रवासन नीतियों की आलोचना करते हुए लंदन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा:
“मैं लंदन को देखता हूं, जहां एक भयानक मेयर है—बहुत भयानक मेयर। शहर इतना बदल गया है, इतना बदल गया है। अब वे शरिया कानून की ओर जाना चाहते हैं। लेकिन आप एक अलग देश में हैं, ऐसा नहीं कर सकते।”
ट्रंप ने आगे यूरोप को ‘अवैध अप्रवासियों की आक्रमण’ का शिकार बताया और UN को पश्चिमी देशों की सीमाओं पर ‘हमले’ का समर्थन करने वाला संस्था कहा। उनका यह बयान खान के मुस्लिम पृष्ठभूमि को निशाना बनाता प्रतीत होता है, जो 2016 से लंदन के पहले मुस्लिम मेयर हैं।
यह विवाद नया नहीं है। ट्रंप के हालिया ब्रिटेन दौरे (सितंबर 2025) के दौरान भी उन्होंने खान को ‘दुनिया के सबसे खराब मेयरों’ में शुमार किया था और कहा था कि उन्होंने खान को विंडसर कैसल के राजकीय भोज से दूर रखने की मांग की थी।
सादिक खान का करारा जवाब
खान के कार्यालय ने ट्रंप के बयान को ‘भयानक और भेदभावपूर्ण’ बताते हुए कहा:
“हम इन भयानक और भेदभावपूर्ण टिप्पणियों का सम्मानजनक जवाब नहीं देंगे। लंदन दुनिया का सबसे बड़ा शहर है, प्रमुख अमेरिकी शहरों से ज्यादा सुरक्षित, और हमें अमेरिकी नागरिकों के रिकॉर्ड संख्या में यहां आने पर खुशी है।”
खान ने व्यक्तिगत रूप से जवाब नहीं दिया, लेकिन ब्रिटिश स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:
“सादिक खान लंदन में शरिया कानून थोपने की कोशिश नहीं कर रहे। वे एक ऐसे मेयर हैं जो प्राइड मार्च में चलते हैं, विविधता का समर्थन करते हैं, और शहर की परिवहन, हवा की गुणवत्ता, सड़कों, सुरक्षा और अवसरों को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं।”
लेबर पार्टी के अन्य सांसदों ने भी ट्रंप की आलोचना की। टूटिंग की सांसद रोसेना अल्लिन-खान ने अमेरिकी राजदूत को बुलाने की मांग की, जबकि ईलिंग सेंट्रल की सांसद रूपा हुक ने इसे ‘साफ झूठ’ कहा।
मुस्लिम ग्रुप का भड़कना
ट्रंप के बयान से ब्रिटिश मुस्लिम समुदाय में गुस्सा भड़क गया है। मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन (MCB) ने इसे ‘इस्लामोफोबिक प्रोपेगैंडा’ करार दिया। MCB के एक प्रवक्ता ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की: “ट्रंप की कल्पनाएं फिर से शुरू हो गई हैं। शरिया कानून का कोई सवाल ही नहीं है—लंदन ब्रिटिश कानून से चलता है।”
MCB ने कहा कि ट्रंप का यह दावा दक्षिणपंथी साजिश सिद्धांतों (जैसे कि खान को ‘इस्लामी कट्टरवाद’ से जोड़ना) को बढ़ावा देता है, जो वर्षों से सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे हैं। संगठन ने ब्रिटिश सरकार से ट्रंप प्रशासन को फटकार लगाने की मांग की।
पृष्ठभूमि और तथ्य
शरिया कानून का सच: ब्रिटेन में शरिया काउंसिलें मौजूद हैं, लेकिन वे केवल धार्मिक सलाहकार भूमिका निभाती हैं—कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं। लंदन या ब्रिटेन में शरिया को आधिकारिक रूप से लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। खान ने कभी इसका समर्थन नहीं किया।
ट्रंप-खान विवाद का इतिहास: 2016 में ट्रंप के पहले ब्रिटेन दौरे के दौरान खान ने उनकी नीतियों की आलोचना की थी। 2017 में ट्रंप ने खान को ‘पत्थर फेंकने वालों का समर्थक’ कहा था। हाल के वर्षों में यह आप्रवासन और ‘इस्लामीकरण’ के आरोपों पर केंद्रित रहा। प्रतिक्रियाएं X पर: X (ट्विटर) पर #SadiqKhan और #ShariaLaw ट्रेंड कर रहा है। समर्थक खान को ‘विविधता का प्रतीक’ बता रहे हैं, जबकि आलोचक ट्रंप के दावे को ‘सच’ मान रहे हैं।







