रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत यात्रा से ठीक पहले एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ (करों) के दबाव को बेअसर बताते हुए कहा, “ट्रंप का दबाव बेअसर है, मोदी प्रेशर में आने वाले नेता नहीं हैं।” पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में जोर दिया कि दुनिया ने भारत की अडिग और स्वतंत्र विदेश नीति को देखा है, और देश को अपने नेतृत्व पर गर्व होना चाहिए।
ट्रंप का दबाव क्यों?
अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के चलते भारत पर 25% से बढ़ाकर 50% तक के टैरिफ लगा दिए हैं। इसका मुख्य कारण भारत का रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखना है।
ट्रंप का मानना है कि इससे रूस की “युद्ध मशीन” को फंडिंग मिल रही है, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आयात नहीं रोका। पुतिन ने इसे भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया।
भारत-रूस संबंधों पर पुतिन के विचार
पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय लेन-देन का 90% से अधिक हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। उन्होंने ऐतिहासिक दोस्ती का जिक्र करते हुए भारत की स्वतंत्रता के बाद 77 वर्षों में हुई प्रगति की सराहना की। सहयोग के क्षेत्र व्यापक हैं—रक्षा, ऊर्जा, व्यापार से लेकर अंतरिक्ष तक—और यात्रा के दौरान इन पर विस्तार से चर्चा होगी।
भारत यात्रा का विवरण
यह पुतिन की भारत की 10वीं यात्रा होगी, जिसमें से तीन मोदी के कार्यकाल में (2016, 2018, 2021) हो चुकी हैं।
अगली बैठक भारत में तय हुई है, और पुतिन ने इसे “अपने दोस्त मोदी से मिलने” का मौका बताया। यात्रा दिसंबर 2025 में होने वाली है, जो दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी।
यह बयान न केवल मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ है, बल्कि भारत की वैश्विक मंच पर स्वतंत्र आवाज को मजबूती भी देता है। ट्रंप के दबाव के बावजूद भारत-रूस व्यापार बढ़ता जा रहा है, जो वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा संदेश है।







