रात के अंधेरे में हरियाली का सफाया दिन में जांच का ड्रामा।
कानून बेबस या संरक्षण मजबूत जलालपुर में अवैध कटान पर बड़ा सवाल
रात में कटते पेड़ दिन में दबती फाइलें जलालपुर में कौन दे रहा संरक्षण
हरा कत्ल जारी जिम्मेदार बेखबर जलालपुर में सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
अम्बेडकर नगर। अम्बेडकर नगर जनपद के जलालपुर तहसील क्षेत्र में हरे पेड़ों के कथित अवैध कटान का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्राम सभा अरई, चौड़ी पुलिया के आगे लाभापार पुल से पहले जीपीएस कैमरे से रिकॉर्ड वीडियो में पेड़ों की कटाई के दृश्य सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, कर्बला बाजार से रफीगंज मार्ग तक अवैध कटान का सिलसिला लगातार जारी होने का आरोप है। पंथीपुर और सुधार नगर के पास भी सड़क किनारे पेड़ों की कटाई की शिकायतें मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधि कथित रूप से लंबे समय से चल रही है, लेकिन जिम्मेदार महकमा प्रभावी कार्रवाई करने में असफल दिखाई दे रहा है शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, तब भी न तो दोषियों की पहचान की जा रही है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है।
आरोप यह भी है कि हर बार जांच के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी कर मामले को शांत कर दिया जाता है, जिससे कथित रूप से अवैध कटान से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ रहा है। गंभीर आरोप सामने आए सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर कुछ लोग नशे के आदी व्यक्तियों को मामूली पैसे देकर रात के समय प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई करवाते हैं। इसके बाद लकड़ी को ठेकेदारों के माध्यम से अन्य स्थानों पर बेचे जाने का भी आरोप है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। साथ ही, कुछ विभागीय कर्मियों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बड़े सवाल खड़े सबसे अहम सवाल यही है कि जब कथित रूप से वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं तो अब तक दोषियों की पहचान और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई क्या यह महज लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ी है यह जांच का विषय बना हुआ है। यदि इस गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो मामले का विस्तृत फॉलोअप कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो सकती है। निष्कर्ष रात के अंधेरे में हरे पेड़ों की कटाई और दिन में फाइलों में सिमटती जांच यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की भी परीक्षा ले रहा है।