किसानों को बर्बाद करने के लिए जीरो प्रतिशत टैरिफ पर अमेरिका से कृषि उप्ताद खरीदेगी मोदी सरकार
किसान आंदोलन ही बचा सकता है देश को, हर किसी को जुड़ना होगा आंदोलन से
चरण सिंह
अमेरिकी ट्रेड डील में किसानों के बर्बाद करने की जो व्यवस्था मोदी सरकार ने की है उसकी जमीनी हकीकत समझने की जरूरत है। दरअसल जब काले कृषि कानूनों को वापस कराने के लिए देश में किसान आंदोलन हुआ तो तमाम हथकंडे अपनाकर भी मोदी सरकार आंदोलन को तुड़वा नहीं पाई। किसानों के आगे पीएम मोदी को झुकना पड़ा और माफ़ी मांगनी पड़ी। तो क्या किसानों से बदला लेने के लिए मोदी सरकार ने जीरो प्रतिशत टैरिफ पर अमेरिका के कृषि उत्पादों के कृषि बाजार खोला है ?
इस बात में दम इसलिए लगता है क्योंकि जब किसान आंदोलन चल रहा था तो बीजेपी समर्थक आंदोलित किसानों के खिलाफ बहुत बुरा-बुरा बोलते थे। जब हमारे जैसे लोग बोलते थे कि किसान रात दिन मेहनत कर लोगों का पेट पालता है तो ये लोग विदेश से अन्न मंगवाने की बात करने लगते थे। तो क्या तभी से ही किसानों को बर्बाद करने की पटकथा मोदी सरकार ने तैयार कर ली थी।
जो लोग अमेरिका से ट्रेड डील को लाभकारी बता रहे हैं वे जरा यह बता दें कि क्या देश के किसान इस डील की मांग कर रहे थे ? क्या भारत के उत्पाद अमेरिका में कम जा रहे थे ? क्या भारत में अमेरिका के कृषि उत्पादों की डिमांड थी ? क्या भारत का निर्यात अमेरिका से कम था ? क्या इससे पहले अमेरिका ने भारत के कृषि बाज़ार को खोलने का दबाव भारत पर नहीं बनाया ? इन प्रश्नों का जवाब ये लोग नहीं दे पाएंगे। दरअसल ट्रेड डील में मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने घुटने तो टेके ही हैं साथ ही किसानों से दुश्मनी भी निकाली है।
पीएम मोदी कितने कमजोर हैं यह बात इससे ही समझी जा सकती है कि अमेरिका भारत पर कृषि मार्केट खोलने के लिए लंबे समय से दबाव बना रहा था पर कोई सरकार अमेरिका के दबाव में नहीं आई। हां रोज शेखी बघारने वाले पीएम मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दबाव में ले लिया।
जमीनी हकीकत यह है कि यह डील बहुत घातक साबित होने वाली है। अमेरिका के कृषि उत्पाद बिना किसी टैरिफ के भारत में बिकेंगे और भारत के उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। बीजेपी और उसके समर्थकों की बेशर्मी देखिये कि अमेरिका ने 2.9 प्रतिशत से बढ़ाकर टैरिफ 18 प्रतिशत कर दिया है। भारत को चेतावनी भी दी कि यदि रूस से तेल ख़रीदा गया तो टैरिफ को बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। विदेश नीति में झंडे गाड़ने का दंभ भरने वाले पीएम मोदी ने भारत के परम्परागत दोस्त रूस को नाराज कर उस अमेरिका से हाथ मिलाया है जो हमेशा से पाकिस्तान का साथ देता आया है।
पीएम मोदी हैं कि वह डोनाल्ड ट्रम्प को अपना व्यक्तिगत मित्र समझते हैं। अमेरिका में जाकर डोनाल्ड ट्रम्प के पक्ष में अबकी बार ट्रम्प सरकार का नारा भी लगा आए थे। डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में गुजरात के अहमदाबाद में नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रम कर 100 करोड़ रुपय जनता के फूंक भी दिए थे।
डोनाल्ड ट्रम्प ने क्या किया ? भारत पाकिस्तान युद्ध में न केवल पाकिस्तान का साथ दिया बल्कि पाकिस्तान के पक्ष में सीज फायर करा दिया। और ट्रम्प ने खुद पोस्ट कर सीजफायर की जानकारी दी। पीएम मोदी चुप रहे। ट्रंप ने टैरिफ 2.9 से बढ़ाकर पहले 25 प्रतिशत और फिर 50 प्रतिशत का दिया। ट्रम्प लगातार मोदी को अपमानित करते रहे और मोदी चुप रहे। ट्रम्प ने यहां तक कह दिया कि वह मोदी का राजनीतिक करियर चौपट कर सकते हैं पर कर नहीं रहे हैं। मतलब इसकी कीमत देश और किसान भुगतेंगे।
स्थिति कितनी नाजुक हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के देश अपनी सेना पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में मोदी सरकार अग्निवीर के नाम पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। खुद पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल नरवणे ने अपनी किताबी फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी में अग्निपथ योजना के बारे में जो लिखा है उसके अनुसार सेना ने 75 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थाई करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था पर सरकार ने उसे घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया।
मोदी सरकार की कमजोरी और गैर जिम्मेदाराना रवैये पर भी इस किताब में भी बहुत कुछ है पर सरकार बेशर्मी पर उतरी हुई है। अब किसान आंदोलन ही देश को बचा सकता है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों को भी किसान आंदोलन में शामिल होना होगा। अब तो पत्रकार, वकील, शिक्षक, ब्यूरोक्रेट्स हर किसी को किसान आंदोलन में शामिल होना होगा।

