विवेक कुमार-
छोटे से गांव बिरनीहाट के नाम पे गडकरी साहब की नींद उड़ी हुई है!
अभी तक मंत्री जी ये कह के इथेनॉल मिला रहे थे कि इससे पॉल्यूशन कम होता है, ये क्लीन फ्यूल है। इससे प्रदूषण कम होगा।
लेकिन एनेथनॉल कैसे बनता है, कैसे ब्लेंड होता है, उसके प्रोसेस से कितना भयंकर प्रदूषण होता है इसके बारे में तो बताया नहीं। एक आदमी ने इससे जुड़ी रिसर्च की जानकारी RTI से मांगी थी वो मंत्रालय ने मना कर दिया था।
सार्थक गोस्वामी नाम का एक फ्रीलांस जर्नलिस्ट है। उसने नितिन गडकरी के इथेनॉल ब्लेंडिंग की सच्चाई उजागर की है।
असम मेघालय के बॉर्डर पर एक गांव है बिरनीहाट जहां इसी इथेनॉल की फैक्ट्री और रिफाइनरी लगी है। 49.5 वर्ग किलोमीटर के एरिया में करीब 41 फैक्ट्री लगी हुई है। यहां इतना प्रदूषण होता है कि यहां सूचकांक 128 पहुंच गया है। WHO के अनुसार ये मात्र 5 होना चाहिए। यहां के नागरिकों को कैंसर हो रहा है। पेड़ पत्ते, सब्जी पर भयंकर कार्बन छाया हुआ है।
इस बारे में मंत्री जी से सवाल करने की बजाय उल्टा इसी पत्रकार को डॉक्यूमेंट्री बनाने से रोका जाने लगा। मंत्री जी कह रहे थे ये ग्रीन फ्यूल है। लेकिन अगर इस बनाने और ब्लेड करने में उतना ही प्रदूषण हो रहा है तो फायदा क्या हुआ? क्या इथेनॉल बनाने, ब्लेंड करने की प्रोसेस पर कोई रिसर्च हुई है? क्या साइंटिफिक तरीके से इसे बेहतर माना गया या फिर बिजनेस ऑपर्च्युनिटी देख के इसे मिलाया जा रहा है? (सौजन्य भड़ास फॉर मीडिया)

