बारिश का अनुमान: बारिश होने से पहले इस पत्थर पर पानी की छोटी-छोटी बूँदें दिखाई देती हैं। हल्की बारिश की संभावना हो तो बूँदें छोटी होती हैं, और भारी बारिश होने पर पत्थर पूरी तरह गीला हो जाता है।
तापमान के अनुसार बदलाव: गर्मी में यह पत्थर गर्म हो जाता है, जबकि सर्दियों में इसका तापमान काफी कम हो जाता है, जो मौसम के बदलाव को दर्शाता है।
ऐतिहासिक महत्व: कहा जाता है कि इस पत्थर को लगभग 500 साल पहले नवाब मुकर्रम अली ने दरगाह की दीवार में स्थापित किया था। यह पत्थर न केवल आध्यात्मिक, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
वैज्ञानिक रहस्य: देश-विदेश के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इस पत्थर का अध्ययन किया, लेकिन इसके मौसम भविष्यवाणी के गुण का रहस्य अभी तक अनसुलझा है। कुछ का मानना है कि यह पत्थर प्राकृतिक रूप से पर्यावरणीय बदलावों के प्रति संवेदनशील है।
मोहम्मद सूफी की विशेषज्ञता: दरगाह के पूर्व सेवक मोहम्मद सूफी इस पत्थर को “पढ़कर” मौसम की सटीक भविष्यवाणी करते थे। उनके बेटे मोहम्मद रिहान के अनुसार, उनके पिता पानीपत में एकमात्र व्यक्ति थे जो इस कला में निपुण थे। दुर्भाग्यवश, मोहम्मद सूफी का निधन हो चुका है।
यह पत्थर आज भी आस्था, विज्ञान, और रहस्य का अनोखा संगम है। श्रद्धालु इसे चमत्कार मानते हैं, जबकि वैज्ञानिक इसके पीछे के प्राकृतिक गुणों को समझने की कोशिश में लगे हैं।
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