गिरफ्तार किये गए आरोपियों में 5 ब्राह्मण, एक कायस्थ और दो यादव पर फांसी की मांग हो रही टिन्नू यादव की
ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा, महासचिव चंपत राय, विशेष सदस्य अनिल मिश्रा और व्यवस्थापक गोपाल राव की क्या थी जिम्मेदारी और जवाबदेही ?
चरण सिंह
बीजेपी की आईटी सेल और गोदी मीडिया को अपना काम तो करना ही है। कोई कितनी भी थू थू करता रहे पर बाज नहीं आना है। राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा, महासचिव चंपत राय और व्यवस्थापक गोपाल राव हैं पर चंदा चोरी का मुख्य आरोपी महासचिव का ड्राइवर बना दिया गया। अरे भाई चम्पत राय की गाड़ी चोरी नहीं हुई है। चंदा चोरी हुआ है।
ड्राइवर का काम गाड़ी चलाने का था या फिर चंदा चोरी का ? ट्रस्ट से जुड़े बिना आखिरकार टिन्नू यादव ने इतने बड़े स्तर पर चंदा चोरी कैसे कर ली ? गिरफ्तार किये गए आरोपियों में 5 ब्राह्मण, एक कायस्थ और दो यादव हैं पर हाईलाइट किया जा रहा है टिन्नू यादव को। जगजाहिर यह भी है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्राह्मण, महामंत्री वैश्य और व्यवस्थापक ब्राह्मण हैं।
दिलचस्प यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस ट्रस्ट का गठन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्य समाज और मोहन भागवत ब्राह्मण ने किया। पर राम मंदिर को लूट लिया यादवों ने ? बिना चंपत राय के हस्तक्षेप के टिन्नू यादव और उसका भतीजा मनीष यादव चंदे से संबंधित विभाग में कैसे चले गए ? क्या चंपत राय की शह के बिना टिन्नू यादव अपने भतीजे मनीष यादव को बुला सकता था ? टिन्नू की मंदिर के दान-पात्र और धन-गिनती कक्ष तक पहुंच कैसे थी ? यह अपने आप में दिल चप्स है कि टिन्नू यादव की पहुंच दान की गिनती वाले कमरे की चाबियों तक थी। क्या इसके लिए चंपत राय नहीं है ?
बताया जा रहा है कि चंदा चोरी का लगभग 1000 करोड़ का घोटाला बताया जा रहा है। अनिल मिश्रा पर तो 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप है। आखिर यह पैसा गया कहां ? सोना, चांदी कहां गई ? सरकारी नुकसान की भरपाई आरोपियों की संपत्ति से करने का दावा करने वाली योगी सरकार राम मंदिर चंदा चोरी की भरपाई कैसे करेगी ?
दरअसल चंदा चोरी का मामला जब सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उठाया तो पहले तो किसी प्रकार की चंदा चोरी न होने का दावा किया गया। अखिलेश यादव की बेटी पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर पोस्ट वायरल करा दी गई। जब मामले ने जोर पकड़ा तो बिना एफआईआर के ही एसआईटी जांच बैठा दी गई, जबकि कोई भी जांच एफआईआर के बाद ही होती है।
मुख्य आरोपी चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव को बना दिया गया। चंदा गिनने वाले अविनाश शुक्ला, सुभाष श्रीवास्तव, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को गिरफ्तार कर लिया गया। बिना रिमांड के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इतना बड़ा मामला और रिमांड भी नहीं। मतलब किसी मगरमच्छ को बचाया जा रहा है। मुग़ल काल में तो मंदिरों को लूटा ही गया। अब राम भक्तों के राज में तो 500 साल के आंदोलन के बाद बने राम मंदिर को ही लूटा जा रहा है। दिलचस्प बात तो यह है कि लूटने वाले भी राम भक्त होने का दावा कर रहे हैं।

