शशि शेखर सिंह
जब तक ममता बनर्जी सत्ता में थी तब तक टीएमसी के विधायकों और सांसदों को ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी में कमियां नहीं दिखी लेकिन ममता बनर्जी के विधानसभा चुनाव हारते ही ममता की खामियां दिख गई ….! एक सवाल अगर ममता बनर्जी चुनाव जीत जाती और फिर टीएमसी की पश्चिम बंगाल में सरकार बन जाती तो क्या इन्हें ममता बनर्जी की खामियां दिखती।
अब सवाल ये कि चुनाव में टीएमसी के पराजय के बाद इन्हें अगर यह आत्मज्ञान हो गया और ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होना था तो बीजेपी के बंगाल प्रभारी भूपेन्द्र यादव के घर क्यों मीटिंग की और उसमें शुभेंदु अधिकारी भी क्यों मौजूद था। इसका अर्थ यह है कि सारा खेल बीजेपी के इशारे पर हो रहा है।
बीजेपी का इतिहास मोदी काल में विरोधी पार्टी की सरकार को तोड़ने, एमएलए खरीदने और बेइमानी से सरकार बनाने का रहा है और बेइमानी से पश्चिम बंगाल में SIR के द्वारा लाखों भारतीय से उनका वोट का अधिकार छीनकर चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर सरकार बनाने के बाद विपक्षी पार्टी टीएमसी को तोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं थी। फिर बीजेपी ने ऐसा क्यों किया …मतलब साफ है कि बीजेपी भारत में सभी विपक्षी दलों को खत्म करने की साजिश कर रही है ताकि भारत में एकादलीय फासीवाद लाया जा सके।

