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मिठास की महारानी (चीनी) 

एक बार फिर से भाव दिखाने लगी है,
हृदय के साथ‑साथ अब
मस्तिष्क पर भी छाने लगी है।

भूमि से उठकर अब
आकाश में विराजमान होने लगी है,
रात्रि में नहीं, अब दिवस में
तारे दिखाने लगी है।

स्वाद लोक की प्यासी लालसा
अब छटपटाने लगी है,
बेबस होकर चिल्लाने लगी है।

हे मिठास लोक की महारानी!

कुछ तो दया करो,
योगी का न सही, कम से कम
मोदी का तो कुछ विचार करो।

नफरत भरे अरमानों पर
थोड़ी सी मिठास भरो,
प्यासी आत्मा को अब तो शांत करो।

कुछ तो दया करो,
कुछ तो दया करो।

के एम भाई

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