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विधवा विलाप बंद कर जमीनी संघर्ष करना होगा विपक्ष को !

चरण सिंह 

बिहार चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिलने पर विपक्ष वोट डकैती की बात कर रहा है। वैसी भी वोट चोरी की बात तो हर चुनाव में करता ही है। हो सकता है कि चुनाव आयोग सरकार के दबाव में गड़बड़ कर रहा हो पर विपक्ष यह भी तो बताए कि उसे लोग वोट क्यों दे ? विपक्ष ऐसा कौन सा काम कर रहा है जिसके आधार पर उसे लोगों से वोट मांगने का हक़ है ? जनहित में विपक्ष ने कितने आंदोलन किये हैं? जनता के लिए विपक्ष ने कब एकजुटता दिखाई ? जनता के लिए विपक्ष के किस दल के किस नेता ने लाठी खाई। जेल गया ? विपक्ष यह चाहता है कि लाठी डंडे जनता खाए और सत्ता की मलाई चाटने के लिए वे तैयार बैठे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर बहुत पहले लिख दिया था कि वंशवाद पर टिका विपक्ष देश के लिए घातक साबित हो सकता है। आज की तारीख में यही हो रहा है। विपक्ष की कमजोरी का फायदा सत्ता पक्ष उठा रहा है। चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए आज के स्थापित नेताओं के बस का संघर्ष नहीं है। ये लोग जातीय आंकड़ों के आधार पर सरकार बनाना चाहते हैं। इसमें दो राय नहीं कि सरकार ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनाई गई सभी एजेंसियों पर दबाव बना रखा है। अपने हिसाब से इनका इस्तेमाल कर रही है।
विशेष रूप से मीडिया सरकार का भोंपू बना हुआ है। ऐसे में जब तक सरकार के खिलाफ जमीनी संघर्ष नहीं होगा तब तक बदलाव की बात सोचना बेमानी है। जेपी आंदोलन की तर्ज पर देश में आंदोलन कर ही बदलाव किया जा सकता है। जातीय समीकरण से कोई बदलाव नहीं होगा। विचारधारा से बदलाव होगा। ये जो राजनीतिक दल कार्यकर्ताओं को गुलाम समझते हैं। उससे बाहर आना होगा। युवा ही बदलाव कर सकते हैं। युवाओं को सम्मान देना होगा। वदलाव के लिए काम करने वाले नेताओं के संघर्ष को आत्मसात करना होगा। जब तक आत्मसम्मान के साथ जमीनी संघर्ष नहीं होगा तब तक बदलाव की कोई उम्मीद नहीं है। युवाओं को भी गुलामी परिपाटी को छोड़कर संघर्ष के बल पर अपनी पहचान बनानी होगी। सरकार ने मीडिया के माध्यम से लोगों को भ्रमित कर दिया है। लोग सही और गलत की पहचान ही नहीं कर पा रहे हैं। जिसका फायदा सरकार उठा रही है।
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