चरण सिंह
दिल्ली की एक अदालत को आधार बनाकर सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से रवीश कुमार, अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा, ध्रुव राठी समेत कई डिजिटल जर्नलिस्ट को अडानी मामले में नोटिस दिया गया। 138 यूट्यूब वीडियो और 83 इंस्टाग्राम वीडियो हटाने के निर्देश दिए गए। जर्नलिस्ट बेचारे सीधे सरकार से टकराव नहीं ले सकते तो बिलबिला कर ही रह गए। दिलचप्स बात यह है कि इस मामले में विपक्ष की किसी राजनीतिक पार्टी की ओर से कोई स्टैंड नहीं लिया गया। उस पार्टी ने भी जिस पार्टी के नेताओं की वीडियो और इंटरव्यू इन वीडियो में थे।
जमीनी हकीकत यह है कि यदि कांग्रेस को छोड़ दिया जाए तो कोई विपक्षी पार्टी खुलकर मोदी सरकार के खिलाफ खड़ी नहीं हो पा रही है। यदि कोई पत्रकार, सोशल एक्टिविस्ट अपने दम पर सरकार की गलत नीतियों से टकरा रहा है तो विपक्ष उसका साथ नहीं दे रहा है। जिसके चलते विपक्षी आंदोलन खड़ा नहीं हो पा रहा है। जिसका फायदा बीजेपी और एनडीए के सहयोगी दल उठा रहे हैं।
यह भी जमीनी हकीकत है कि विपक्ष ऐसे मुद्दे उठा रहा है जो सत्ता से जुड़े हैं न कि जन समस्याओं से। मतलब विपक्ष को सत्ता से मतलब है न कि जन समस्याओं से। चाहे एसआईआर का मामला हो वोट चोरी का मामला हो। या फिर विपक्ष की ओर से उठाया गया कोई मामला। सभी मामले सत्ता से जुड़े हैं। मतलब विपक्षी दलों की प्राथमिकता सत्ता पाना है। और सब बातें बाद में। ऐसा भी नहीं कि ये लोग सत्ता में न रहे हों। विपक्ष की लगभग सभी पार्टियां सत्ता में रही हैं। आजमाई हुई हैं। फिर सत्ता में आकर ये लोग ऐसा अलग से क्या कर देंगे, लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं। जिसका फायदा बीजेपी को मिल रहा है। जिस तरह से विपक्ष ने
एकजुटता दिखाकर जनहित में कोई बड़ा कार्यक्रम या आंदोलन नहीं नहीं किया है। उससे तो यही लगता है कि विपक्ष में बैठी पार्टियों को भी जनता के लिए कुछ नहीं करना है। ये लोग भी सत्ता इसलिए हासिल करना चाहते हैं कि इनको फिर से पुराना जैसा रुतबा और पावर मिल सके। जब जनता के लिए विपक्ष में रहकर सड़कों पर नहीं उतर सकते तो क्या गारंटी है कि सत्ता में आकर जनता के लिए काम करेंगे ?
यदि बीजेपी हिन्दू मुस्लिम की राजनीति कर रही है तो विपक्षी पार्टियां क्या कर रही हैं ? ये लोग भी तो जाति धर्म की राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस दलित और मुस्लिम पर फिर से फोकस कर रही है। सपा पीडीए का राग अलाप रही है। आम आदमी पार्टी फ्री की योजनाओं के बल पर सत्ता में आई थी और फ्री की योजनाओं पर ही जनता को बरगलाती है। लगभग सभी पार्टियां जाति और धर्म की राजनीति कर रही है। बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों पर कोई दल काम करने को तैयार नहीं। देश और समाज के लिए कोई काम करने के लिए कोई तैयार नहीं।








