रिजीम चेंज प्रकृति का नियम, आंदोलन से इतनी बौखलाहट क्यों ? जेपी और अन्ना आंदोलन भी तो रिजीम चेंज के लिए हुआ था
रिजीम चेंज में मुख्य भूमिका निभाता रहा है प्रशांत भूषण का परिवार
प्रशांत भूषण अन्ना आंदोलन तो उनके पिता शांतिभूषण थे शामिल थे जेपी आंदोलन में
चरण सिंह
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने वैसे तो नागपुर में विजयादशमी पर्व पर काफी बड़ा भाषण दिया है। प्रमुख रूप से उनके भाषण में आंदोलन समस्या नहीं बल्कि समाधान के लिए हो और रिजीम चेंज से समस्या का समाधान नहीं होगा वाले प्वाइंट पर चर्चा होनी चाहिए। मोहन भागवत के ये दोनों प्वाइंट केंद्र सरकार के बचाव में हैं। मोहन भागवत की बातों से लग रहा है कि जैसे देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार समेत विभिन्न मुद्दों पर चल रहा आंदोलन समाधान के लिए नहीं बल्कि समस्या खड़ी करने के लिए हो रहा है। दूसरे प्रख्यात वकील प्रशांत भूषण ने जो रिजीम चेंज की बात की है, मोहन भागवत उससे सहमत नहीं हैं। वह नहीं चाहते हैं कि आंदोलन सत्ता परिवर्तन के लिए हो । यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि मोदी सरकार में मोहन भागवत जमकर सत्ता की मलाई चाट रहे हैं।
मोहन भागवत देश को बताएं कि आप क्या हैं ? आपको किस बात का खतरा है कि आपको जेड प्लस सिक्योरिटी मिली है। देश में युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। लोग महंगाई से कराह रहे हैं। सरकार को 80 करोड़ लोगों को फ्री में राशन देना पड़ रहा है। मतलब देश के हालात ठीक नहीं हैं। ऐसे में मोहन भागवत बताएं कि बीजेपी कार्यालयों समेत आरएसएस के ऑफिस भी फाइव स्टार होटल की तरह कैसे हो गए हैं ? ऐसे स्थिति में इन सबकी क्या जरूरत थी ? यह पैसा कहां से आया ? 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त पर किसी तरह की कार्रवाई न होने का कानून क्यों लाया गया ?
फॉर्म – 6 में बदलाव का क्या मतलब ? क्या देश में 13 करोड़ घुसपैठिए हैं ? यदि हैं तो मोदी सरकार को 13 साल होने जा रहे हैं। कितने घुसपैठिए चिन्हित किये और कितने विदेश भेजे ? भागवत जी इस सरकार में आप कितनी समस्याओं के हल के लिए आगे आए हैं ? कभी प्रधानमंत्री से चरम पर पहुंची बेरोजगारी और महंगाई पर बात की ? कभी जेन जी की समस्याओं पर बात की ? चुनाव आयोग की धांधलियों पर बात की ? नहीं न ?
क्या आज़ाद भारत में सवाल पूछना गुनाह है ? क्या तिरंगा लहराना गुनाह है ? यदि नहीं तो फिर देश के युवाओं को उनके सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है ? जंतर मंतर पर तिरंगा लहराकर आशुतोष रांका और सौरव दास ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया जो उन्हें तिहाड़ जेल में डाल दिया है। सेंटर पार्क में तिरंगा लहराने से कौन अपराध हो जाता ? जिस तिरंगे के दम पर देश को आज़ादी मिली उसके लहराने में दिक्कत क्या है ?
जहां तक रिजीम चेंज की बात है। समाजवाद के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया का तो नारा ही यही था कि जिंदा कौमे पांच साल तक इंतजार करतीं। जब मोदी सरकार मनमानी कर रही है। किस की बात सुनने को तैयार नहीं। सरकार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को डंडे के दम पर दबाया जा रहा है। ऐसे में आंदोलन रिजीम चेंज करने के लिए ही तो होगा। जिन प्रशांत भूषण ने रिजीम चेंज की बात की है वह खुद अन्ना आंदोलन के मुख्य आंदोलनकारी थे। उनके पिता शांति भूषण ने जेपी आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाई थी। जनता पार्टी की सरकार में वह कानून मंत्री थे। क्या इससे पहले रिजीम चेंज करने के लिए आंदोलन नहीं हुए हैं ?
भागवत जी आप लोग तो जेपी आंदोलन और अन्ना आंदोलन दोनों में शामिल थे। तो क्या तब आंदोलन समस्या का समाधान था ? रिजीम चेंज के लिए आंदोलन करना गर्व की बात था ? क्योंकि अब आरएसएस के पुत्र संगठन बीजेपी की सरकार है तो अब आंदोलन समस्या खड़ी कर रहा है ? रिजीम चेंज से समस्या का समाधान नहीं होगा। यह बात आरएसएस और बीजेपी दोनों को समझने की जरूरत है कि अब जनता जाग चुकी है। अब ज्यादा समय तक जनता को बरगलाया नहीं जा सकता है। अब लोग सड़कों पर उतरकर अपना हक़ मांग रहे हैं। आप लोग वोट डालने का अधिकार छीनने में लग गए हैं। लोग अब भी न बोलें ?

