सरकार कर रही संधू और जोशी के करीबियों पर ईडी और सीबीआई का शिकंजा कसने की तैयारी
सुखबीर सिंह संधू के उत्तराखंड के तो विवेक जोशी के हरियाणा के मुख्य सचिव रहते हुए ढूंढी जा रही है कोई कमजोरी
इन दोनों चुनाव आयुक्तों के हौसले को बरकरार रखने के लिए विपक्ष की एकजुटता के साथ सड़कों पर उतरना जरूरी
संधू और जोशी पर दबाव बना ले गई केंद्र सरकार तो बिगड़ जाएगा विपक्ष का खेल
देश में दूसरी आज़ादी की लड़ाई लड़ने की जरूरत
चरण सिंह
जिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के दम पर बीजेपी मनमाफिक चुनाव जीत रही थी। उन ज्ञानेश कुमार की पोल खुलने के बाद क्या केंद्र सरकार चुप बैठी होगी ? सारा खेल बिगड़ता देख क्या पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शांत होंगे ? क्या अब केंद्र सरकार ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा ले लेगी ? ये प्रश्न इस समय राजनीतिक गलियारों में चक्कर लगा रहे हैं ? जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार केंद्र सरकार अपने रवैये में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है। सरकार की रणनीति है कि किसी भी तरह से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को साधा जाए और इंडियन एक्सप्रेस और विपक्ष की हवा निकाली जाए।
जानकारी मिल रही है कि केंद्र सरकार सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी दोनों की जड़ों को खोदने में लग गई है। क्योंकि सुखबीर सिंह उत्तराखंड के मुख्य सचिव रहे हैं तो विवेक जोशी हरियाणा के। जोशी एसबीआई के डायरेक्टर भी रहे हैं। केंद्र सरकार एक ओर इन दोनों आईएएस अफसरों के करीबियों पर ईडी और सीबीआई का शिकंजा कसने की तैयारी में है तो दूसरी ओर दोनों के मुख्य सचिव रहते हुए कोई कमजोरी ढूंढी जा रही है। जानकारी यह भी मिल रही है कि कोई फर्जी मामला बनाकर इनकी छवि ख़राब करने की रणनीति पर भी काम चल रहा है।
दरअसल इंडियन एक्सप्रेस में जिस तरह से ज्ञानेश कुमार के बीजेपी को जितवाने के खेल को उजागर किया गया उससे चुनाव आयोग ही नहीं बल्कि पूरी केंद्र सरकार भी पूरी तरह से हिल गई है। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की समझ में नहीं आ रहा है कि इस आफत से कैसे निपटा जाए। इन दोनों दिग्गजों को समझ में नहीं आ रहा है कि यह आफत ज्ञानेश कुमार पर नहीं बल्कि उन पर आई है। यदि ये दोनों चुनाव आयुक्त खुलकर मीडिया के सामने आ गए तो ज्ञानेश कुमार ही नहीं बल्कि सरकार को ही बेनकाब कर देंगे। इसलिए किसी भी तरह से इन दोनों पर शिकंजा कसने की रणनीति पर काम हो रहा है। केंद्र सरकार इन दोनों चुनाव आयुक्तों को नियंत्रण में लेना चाहती है। जानकारी मिली है कि सरकार का इन्हें मनाने का प्रयास तो विफल हो चुका है। अब डराने की रणनीति अपनाई जा रहे है।
सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हौसले को इस समय विपक्ष की एकजुटता की जरूरत है। विपक्ष का आंदोलन इन दोनों चुनाव आयुक्तों के हौसले को बढ़ा सकता है। यदि विपक्ष कमजोर पड़ गया तो संधू और जोशी दोनों ही की बैकफुट पर आने की आशंका है। दरअसल सम्मानित आदमी के लिए परिवार बड़ी कमजोरी होती है। इसलिए केंद्र सरकार पारिवारिक डर दिखाकर इन दोनों चुनाव चुनाव आयुक्तों को लपेट सकती है।

