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मायावती के सामने पार्टी को बचाना सबसे बड़ी चुनौती !

चरण सिंह 

उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रही मायावती के सामने आज की तारीख में पार्टी को बचाना बड़ी चुनौती है। केंद्र सरकार ने उन इंडिया गठबंधन में शामिल न होने का दबाव बना रखा है। स्थिति यह है कि जरा सी खबर उनके इंडिया गठबंधन में शामिल होने चलती है तो बीजेपी उनके कान ऐंठकर उनके बयान दिलवा देती है। मायावती की दिक्कत यह है कि पार्टी को बचाने के लिए उनको बीजेपी के खिलाफ खड़ा होना होगा और बीजेपी उसके इंडिया गठबंधन के साथ खड़ा नहीं होने दे रही है। मायावती की स्थिति त्रिशंकू जैसी है। हालांकि वह अकेले चुनाव लड़ने का दंभ लगातार भर रही है।
यह जमीनी हकीकत है कि तेलंगाना में केसीआर से गठंबधन करने वाली बसपा मुखिया ट्वीट कर कहती हैं कि वह अकेला चुनाव लड़ने पर अटल हैं। उनका कहना है कि तीसरा मोर्चा बनाने या फिर इंडिया गठबंधन में जाने की जो खबरें चलाई जा रही हैं ये शरारती कृत्य है। उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाते हुए उनके समर्थकों को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। दरअसल मायावती को लेकर इंडिया गठबंधन जाने को लेकर लगातार खबरें चल रही हैं। हाल ही में एक खबर ने जोर पकड़ा कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और मायावती के बीच कुछ चल रहा है। कहा जाने लगा कि चुनाव की घोषणा होते ही मायावती इंडिया गठबंधन में शामिल हो जाएंगी।
मायावती को तुरंत ट्वीट करना पड़ा कि वह अकेले ही चुनाव लड़ेंगी। उनका किसी से कोई गठबंधन नहीं होने जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि केंद्र सरकार ने मायावती पर दबाव बना रखा है कि उन्हें अकेले ही चुनाव लड़ना है। इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं होना है। वैसे भी केंद्र सरकार ने ही हाल ही में उनके भतीजे आकाश आनंद को वाइ प्लस सिक्योरिटी दी है। यह सब भाजपा का मायावती को इंडिया गठबंधन में जाने से रोकना है। इसमें दो राय नहीं कि किसी समय मायावती का न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में ठीक ठाक जनाधार माना जाता था। बसपा को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी मिल गया था। आज भले ही उत्तर प्रदेश में बसपा का एक विधायक हो, भले ही उसके 10  सांसद दूसरे दलों से चुनाव लड़ने की जुगत भिड़ा रहे हों पर आज भी मायावती की पकड़ दलित समाज पर ठीकठाक बताई जाती है। उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती आज की तारीख में केंद्र सरकार के दबाव में है। बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचार के आरोप के चलते मायावती जैसी बोल्ड लीडर को चुप रहना पड़ रहा है। इन्हीं मायावती ने बाहुबली डीपी यादव को पार्टी से बाहर करने में एक सेकेंड नहीं लगाए। डीपी यादव ने एक सभा में अपने बेटे को चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था।

 मायावती को डीपी यादव का वह ऐलान बहुत अखरा था और उन्होंने डीपी यादव को पार्टी से बाहर निकाल दिया था। ऐसे ही अपने ही सांसद उमाकांत यादव को उन्होंने गिरफ्तार करा दिया था। मायावती ऐसी बोल्ड शासक थीं कि जब वह मुख्यमंत्री हुआ करती थीं और दिल्ली आती थी तो नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों में हड़कंप मच जाता था। फर्श से अर्श तक पहुंचने वाली मायावती संगठन में दलितों को ज्यादा तरजीह देती है।
 यह मायावती का जनाधार ही है कि इंडिया गठबंधन और एनडीए दोनों उन्हें अपने साथ लेना चाहते हैं। गठबंधन में कांग्रेस तो आज भी उन्हें लेना चाहती है। अभी भी यह माना कि चुनाव की घोषणा होने पर मायावती इंडिया गठबंधन का हिस्सा बन सकती हैं।
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