अति आनंद उमगि अनुरागा ।चरण सरोज पखारन लागा ।।
नोएडा सेक्टर 93 सुपर एमआईजी स्थित सनातन धर्म मंदिर में आयोजित श्री राम कथा के छठवें दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज ने आगे का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान राम, माता सीता और सभी भाइयों के विवाह के बाद अवध में आ जाते हैं । महाराज दशरथ गुरु से आज्ञा लेकर राम को युवराज बनाने की घोषणा करते है पूरी अयोध्या में खुशी छा जाती है। सभी देवता यह जानकर परेशान हो जाते हैं कि अगर राम का राज्याभिषेक हो जाएगा तो राक्षसों का वध कैसे होगा। सरस्वती जी से सभी प्रार्थना करते हैं और सरस्वती जी मंथरा की बुद्धि को पलट देती हैं वह कैकेयी को अपने दो वरदान राजा दशरथ से मांगने के लिए कहती है। कैकयी कोपभवन में चली जाती है और दशरथ से दो वरदान मांगती है कि भरत को राज्य और राम को वनवास।

दशरथ जी अचेत हो जाते है। रामजी लक्ष्मण और सीता के साथ वन को चले जाते हैं। केवट प्रसंग सुनाते हुए व्यास जी ने बताया कि गंगा किनारे पहुंचने पर केवट से नाव लाने को कहते है। ” मांगी नाव न केवट आना, कहहु तुम्हार मरमु में जाना” केवट कहता है कि मैं तुम्हारा मर्म जनता हूँ। जिनकी चरण रज लगते ही पत्थर की शिला नारी बन गयी अगर मेरी नाव भी नारी बन गयी तो मेरी रोजी रोटी का क्या होगा। बिना पैर धुलवाए आपको नाव में नहीं बैठाउँगा । ” अति आनंद उमगि अनुरागा, चरण सरोज पखारन लागा”। ऐसा कहकर भगवान राम , लक्ष्मण और सीता के पैर धोकर पूरे परिवार सहित उस चरणोदक को पीता है। इसके बाद गंगा के पार उतारता है।
12 जून को राम और भारद्वाज मुनि का संवाद सहित कई प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इस मौके पर राजवीर सिंह, वीरेंद्र द्विवेदी, राजेश कुमार गुप्ता, राज दूबे, आदित्य अग्रवाल, श्याम मौर्य, रमेश चंद्र शर्मा, एल एस तिवारी, विजय झा,देवमणि शुक्ल , रवि राघव, गोरे लाल, रमेश वर्मा, संजय पांडे, हरि शंकर सिंह, रमेश दास, जितेंद्र सतपति, उमाकांत त्रिपाठी, विकास शर्मा, विश्वनाथ त्रिपाठी, आचार्य गौरव, अंगद सिंह तोमर, संगम प्रसाद मिश्रा, रमेश चंद्र दास, धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, विनय त्रिवेदी, दिनेश पाठक, धर्मेंद्र सिंह, रंजन गिरि, प्रमोद भारद्वाज, सर्वेश कुमार तिवारी, दिनेश पाठक, श्रीमती नीलम द्विवेदी, मंजू गुप्ता, सचिता राय , कोमल राठौर, संध्या तिवारी, रेशमा दूबे सहित तमाम लोग मौजूद रहे।








