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टाटा-पटना वंदे भारत, क्या पुरानी तेज रफ्तार ट्रेन को भूला दिया जाएगा?

 जमशेदपुर/पटना। आगामी 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी टाटा- पटना वंदे भारत एक्सप्रेस सहित देशभर में कई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह ट्रेन साढ़े सात घंटे में पटना तक अपनी यात्रा पूरी करेगी। लेकिन जमशेदपुर (टाटानगर) में नई पीढ़ी को शायद ही मालूम होगा टाटा-पटना के लिए एक ऐसी ट्रेन 90 के दशक मे चलती थी जो सुबह टाटा से पटना जाकर रात को वापस टाटा आ जाती थी। इस ट्रेन की काफी मांग थी। इस ट्रेन का परिचालन पुरूलिया, आसनसोल जसीडीह के रास्ते होता है।
टाटा से पटना के लिए यह ट्रेन सुबह 5.10 के आस पास रवाना होकर दिन के 1.25 मिनट पर पटना पहुंच जाती थी। फिर वापसी के क्रम में दिन के 2.25 मिनट पर पटना से प्रस्थान कर रात के 11.25 मिनट पर टाटा पहुंच जाती थी।
टाटा-पटना के बीच चलने वाली इस ट्रेन का ठहराव शुरुआत के दिनों में मात्र चार स्टेशनों पर होता था। यह टाटानगर से खुलकर सीधे आसनसोल-जसीडीह और पटना पहुंचती थी। बाद में इसका ठहराव बढ़ता गया।
टाटा-पटना के बीच चलने वाली इस सुपरफास्ट ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों को सुपरफास्ट का अतिरिक्त चार्ज उस वक्त देना पड़ता था। टाटा से यह ट्रेन सप्ताह में 6 दिन चला करती थी. शनिवार को इस ट्रेन का परिचालन बंद रहता था ताकि इस ट्रेन के रैक का मेंटेनेंस हो सके।
इस ट्रेन की टाइमिंग में अब बदलाव हुआ है। पहले टाइमिंग सुबह 5.15 से बदलकर सुबह साढ़े सात बजे किया गया। उसके बाद इस ट्रेन का विस्तार दानापुर तक किया गया। काफी समय तक टाटानगर-दानापुर तक यह ट्रेन चली। उसके बाद इसका विस्तार आरा तक किया गया। कुछ दिन के बाद इस ट्रेन का विस्तार बक्सर तक किया गया।फिलहाल यह ट्रेन टाटानगर-बक्सर के बीच चल रही है।

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