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सावन में मटन पार्टी का स्वाद, बिहार में गरमाई सियासत

पटना। सावन जैसे पवित्र महीने में मटन पार्टी को लेकर बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह द्वारा लखीसराय के सूर्यगढ़ा में आयोजित मटन पार्टी का वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों—राजद और कांग्रेस—ने एनडीए पर तीखा हमला बोला है।

 

विपक्ष का हमला:

 

वीडियो सामने आने के बाद राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा, “धर्म के ठेकेदार खुद वही काम कर रहे हैं, जिन पर दूसरों को उपदेश देते हैं।” उन्होंने राहुल गांधी और लालू प्रसाद की पुरानी मटन पार्टी की याद दिलाते हुए पूछा कि “तब तो एनडीए नैतिकता और हिंदू भावनाओं की दुहाई दे रहा था, अब चुप क्यों है?” कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञानरंजन ने तंज कसते हुए कहा, “एनडीए की वॉशिंग मशीन में सभी दाग-धब्बे साफ हो जाते हैं, इसलिए इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।”

 

मटन पार्टी का सच:

 

यह मटन पार्टी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह द्वारा अपने चुनाव क्षेत्र मुंगेर के अंतर्गत सूर्यगढ़ा में आयोजित की गई थी। पार्टी में भारी संख्या में जदयू कार्यकर्ता शामिल हुए और मटन खाने का लुत्फ उठाया। मंच से खुद ललन सिंह कार्यकर्ताओं को खाने के लिए आमंत्रित करते दिखाई दिए। हालांकि वहां शाकाहारी व्यंजन की भी व्यवस्था थी, लेकिन मटन को लेकर ही सियासी तूफान खड़ा हो गया।

 

राजनीतिक पृष्ठभूमि:

 

यह पहला मौका नहीं है जब सावन में मटन खाने को लेकर राजनीति गरमाई हो। एक साल पहले राहुल गांधी और लालू यादव की मटन पार्टी को लेकर बीजेपी ने जोरदार हमला बोला था। दिवंगत नेता सुशील मोदी ने राहुल को ‘जनेऊधारी इच्छाधारी’ बताते हुए हमला बोला था। तब लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने बीजेपी को जवाब देते हुए कहा था, “क्या खाना है, क्या पहनना है, ये बीजेपी तय नहीं कर सकती।”

 

तेजस्वी का मछली वीडियो भी बना था मुद्दा:

 

लोकसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव द्वारा मछली खाते हुए एक वीडियो पोस्ट करने पर भी बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाया था। अब ललन सिंह की मटन पार्टी ने विपक्ष को पलटवार का नया अवसर दे दिया है।

सावन में मटन खाने पर राजनीति भले बार-बार हो, लेकिन यह मुद्दा अब दोहरा मापदंड और अवसरवादिता का प्रतीक बनता जा रहा है। सवाल यह नहीं कि मटन किसने खाया, सवाल यह है कि क्या यह मुद्दा जनता की असली समस्याओं से ध्यान भटकाने का जरिया बन गया है?

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