‘वक्फ बाय यूजर’ का क्या होगा?
कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने ‘वक्फ बाय यूजर’ की पंजीकरण आवश्यकता पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यानी, मौजूदा वक्फ बाय यूजर संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य रहेगा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधि सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि कोर्ट ने ‘वक्फ बाय यूजर’ पर उनका पक्ष स्वीकार किया है।
सरकार की प्रतिबद्धता: केंद्र सरकार ने अप्रैल में आश्वासन दिया था कि कोई भी वक्फ (नोटिफिकेशन या पंजीकरण से घोषित, जिसमें वक्फ बाय यूजर शामिल) डिनोटिफाई नहीं होगा, और उनकी स्थिति बरकरार रहेगी। कोर्ट ने इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
किन फैसलों/प्रावधानों पर रोक लगी?
कोर्ट ने निम्नलिखित प्रमुख प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगा दी:
प्रावधानविवरणकारणधारा 3(1)(r)वक्फ बनाने के लिए व्यक्ति को कम से कम 5 साल से इस्लाम का अभ्यासकर्ता होना चाहिए।बिना किसी तंत्र (मैकेनिज्म) के यह मनमाने ढंग से शक्ति का उपयोग कर सकता है। राज्य सरकारें नियम बनाने तक यह प्रावधान रोका गया।धारा 3C(2) का प्रोविज सरकारी अधिकारी (जिला कलेक्टर) को वक्फ संपत्ति के सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के विवाद तय करने का अधिकार।यह शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन करता है, क्योंकि कार्यकारी अधिकारी निजी नागरिकों के अधिकार तय नहीं कर सकता। ट्रिब्यूनल के फैसले तक तीसरे पक्ष के अधिकार नहीं बनाए जा सकेंगे।
कौन से प्रावधान बरकरार रहेंगे?
कोर्ट ने अधिनियम के अधिकांश हिस्सों को बरकरार रखा। प्रमुख उदाहरण:
प्रावधानविवरणकोर्ट की टिप्पणीवक्फ का अनिवार्य पंजीकरणसभी वक्फ (नया या पुराना, जिसमें वक्फ बाय यूजर शामिल) का पंजीकरण जरूरी।यह नई आवश्यकता नहीं है; 1995 और 2013 के पुराने कानूनों में भी था। कोर्ट ने पंजीकरण की समयसीमा बढ़ा दी (विशिष्ट विवरण जजमेंट अपलोड होने पर स्पष्ट होगा)।वक्फ बोर्ड/काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्तिकेंद्रीय वक्फ काउंसिल में अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम, राज्य वक्फ बोर्ड में अधिकतम 3।रोक नहीं लगाई गई। कोर्ट ने कहा कि जितना संभव हो, एक्स-ऑफिशियो सदस्य मुस्लिम हो।
फैसले का समग्र सारांश
सुनवाई का संदर्भ: यह फैसला 22 मई को रिजर्व किया गया था। याचिकाएं असदुद्दीन ओवैसी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड आदि ने दायर कीं। बीजेपी शासित राज्य और केरल ने अधिनियम का समर्थन किया।
मुख्य उद्धरण:
5-वर्षीय शर्त पर: “बिना तंत्र के यह मनमाने ढंग से शक्ति का उपयोग करेगा।”
कलेक्टर के अधिकार पर: “कार्यकारी अधिकारी निजी नागरिकों के अधिकार तय नहीं कर सकता, यह शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन है।”
अगला कदम: मामला लंबित रहेगा, और पूर्ण सुनवाई के बाद अंतिम फैसला आएगा। कोर्ट ने कहा कि कुछ प्रावधानों को “संरक्षण” की जरूरत है, लेकिन पूरा कानून वैध माना गया।
यह फैसला वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और संवैधानिक सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। अधिक विवरण के लिए आधिकारिक जजमेंट का इंतजार करें।13 web pages3sExpertHow can Grok help?

