सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने और उनके प्रबंधन से संबंधित मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। डॉग लवर्स और याचिकाकर्ताओं की दलील है कि शेल्टर होम पहले से ही भरे हुए हैं और वहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है, इसलिए कुत्तों को पकड़ने से रोका जाए। उनका तर्क है कि यह क्रूरता के समान है, क्योंकि शेल्टर होम में पर्याप्त देखभाल नहीं हो पाती। दूसरी ओर, यह भी माना जा रहा है कि सड़कों पर आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी उपायों की जरूरत है, लेकिन शेल्टर होम की स्थिति इसका समाधान नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रखा।
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