कोटद्वार में मुस्लिम की दुकान बाबा के नाम से चलाने का मामला
एफआईआर उस घटना के बाद दाखिल की गई थी जिसमें जिम संचालक दीपक कुमार ने कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार पर अपनी दुकान का नाम बदलने का दबाव डाल रहे बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद सदस्यों को टोका और रोका था और पूछने पर अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह अंतरिम आदेश दीपक की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द करने से इनकार किए जाने को चुनौती दी गई है।
दीपक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि बजरंग दल के सदस्यों द्वारा एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताने के बाद दीपक ने हस्तक्षेप किया था। यह घटना गणतंत्र दिवस के दिन हुई थी और इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।
इसके बाद कई एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें विहिप के सदस्यों द्वारा कुमार के खिलाफ दंगा और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने जैसे आरोपों में एक एफआईआर शामिल है और अन्य एफआईआर दुकानदार तथा स्वयं कुमार की शिकायतों के आधार पर दर्ज हुईं।
सिंघवी ने दलील दी कि दीपक ने खुद इस घटना को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई।
सिंघवी ने हाईकोर्ट के उस निर्देश पर भी चिंता जताई, जिसमें दीपक को इस घटना के बारे में सोशल मीडिया पर संदेश या वीडियो पोस्ट करने से रोक दिया गया था। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को राहत देने के बजाय हाईकोर्ट ने उन पर ‘पूर्ण प्रतिबंध’ लगा दिया।
चार सप्ताह में जवाब देने के लिए नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस बीच संबंधित एफआईआर के तहत कार्यवाही पर रोक रहेगी।
शीर्ष अदालत ने विवादित हाईकोर्ट आदेश के प्रभाव और उसके अमल पर भी रोक लगा दी जिसमें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से संबंधित प्रतिबंध भी शामिल है।

