चरण सिंह
एसआईआर के दबाव में मुरादाबाद में एक बीएलओ के आत्महत्या करने से फिर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा दी है। इस बीएलओ ने आत्महत्या करने से पहले रोते हुए एक वीडियो बनाया है। जिसमें वह रोते हुए अपनी बेबसी बयां कर रहा है। एक सुसाइड नोट भी लिखा है। इस नोट में उसने समय कम मिलने और ट्रेनिंग न मिलने की बात कही है। एसआईआर के दबाव में देशभर में 30 बीएलओ दम तोड़ चुके हैं।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या एसआईआर नहीं होना चाहिए ? होना तो चाहिए पर बीएलओ को पर्याप्त समय तो मिले। उनको प्रशिक्षण तो मिले। जिस काम को पूरा होने में छह महीने चाहिए उस काम को चुनाव आयोग एक महीने में पूरा कराना चाहता है। समय का हवाला देकर बीएलओ को प्रताड़ित किया जा रहा है। ऐसे में बीएलओ प्रेशर में हैं। दरअसल बीएलओ की परेशानी यह है कि उनको न तो कोई ट्रेनिंग दी गई है और न ही समय दिया जा रहा है। उधर विपक्ष एसआईआर के पीछे सरकार का षड्यंत्र बता रहा है।
इस एसआईआर के पीछे घुसपैठ और गलत वोट बने होना बताया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर की आड़ में उनके जीते क्षेत्र में वोट कटवाना है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तो सीधे सीधे बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए उनके जीते बूथ पर वोट कटवाने का आरोप लगाया है।
इस एसआईआर से एक बात तो समझ में आ गई है कि बीएलओ दबाव में हैं पर मैं आत्महत्या करने वाले लोगों को कायर मानता हूँ। परिस्थिति से घबराना नहीं चाहिए। लड़ना चाहिए। ज्यादा दबाव है तो छुट्टी ले लो। छुट्टी मिले तो नौकरी छोड़ दो। नहीं तो गलत बात का विरोध करो। अपनी जान देने से हल नहीं निकलेगा। लड़ना होगा।

