रुचि वीरा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आजम खान पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं और उन्होंने रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जिन्हें जनता याद करती है। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे डॉ. एसटी हसन के बयान को लेकर आपस में न उलझें और बिना जरूरत के बयानबाजी से बचें। उन्होंने यह भी कहा कि आजम खान और अखिलेश यादव के बीच कोई नाराजगी नहीं है।
वहीं, डॉ. एसटी हसन ने कहा कि आजम खान उनके सम्मानित नेता हैं, लेकिन उनके खिलाफ योगी सरकार ने झूठे मुकदमे लादकर जेल में डाला है। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव ने आजम खान की हर संभव मदद की है, लेकिन यह बात सार्वजनिक नहीं की जा सकती। हालांकि, हसन ने यह भी स्वीकार किया कि उनके लोकसभा टिकट कटने के बाद आजम खान से मिलने का उनका मन नहीं करता, जिससे उनके बीच दूरी का संकेत मिलता है।
इस विवाद ने सपा के भीतर मुस्लिम नेतृत्व और आजम खान के प्रभाव को लेकर चर्चाओं को और हवा दी है। कुछ सूत्रों का कहना है कि आजम खान का परिवार आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद और अन्य दलों जैसे कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी के संपर्क में है, जिससे सपा की मुस्लिम वोट बैंक की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पार्टी ने आजम खान और उनके परिवार के लिए सड़क से लेकर संसद और न्यायपालिका तक हर संभव लड़ाई लड़ी है। यह विवाद सपा के लिए आंतरिक एकता और 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति के लिए चुनौती बन सकता है।








