Site icon Thenews15.in

तो जीएसटी उत्सव मनाने के लिए संबोधित करना पड़ा देश को ?

चरण सिंह 
प्रधानमंत्री मोदी जीएसटी कम कर ऐसा माहौल बना रहे हैं कि जैसे बढ़ाई किसी और सरकार ने थी और कम उन्होंने की है। यह अपने आप में दिलचप्स है कि यह बात बताने के लिए उन्हें देश को संबोधित करना पड़ा। देश को संबोधित करना मोदी ने चुनावी सभा समझ लिया है। ऐसा क्या था पीएम मोदी के भाषण में जो नया हो। नवरात्रि के शुरू होते ही जीएसटी कम हो जाएगी यह बात तो जगजाहिर हो चुकी थी। जमीनी हकीकत तो यह है कि देश को संबोधित तब किया जाता है जब सरकार कोई बड़ा निर्णय लेती है या फिर देश को किसी बड़े मकसद के लिए तैयार किया जाता है।
जीएसटी कम करने की खुमारी में मोदी इतने डूब गए कि रामलीला और नवरात्रि उत्सव उन्हें याद नहीं आया। जीएसटी उत्सव मनाने की बात कर रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि अत्यधिक जीएसटी लगाने वाले पीएम पर जब जीएसटी कम करने के लिए चौतरफा दबाव बना तो उन्हें जीएसटी घटानी पड़ी। अब जनता पर इसका एहसान जता रहे हैं। यह अपने आप में दिलचस्प है कि जनता के दिए टैक्स से जो लोग वेतन पाते हैं। विदेश घूमते हैं। और खर्च करते हैं। वे लोग ऐसा दर्शा रहे हैं कि जैसे जनता को भीख दे रहे हों। मोदी का तो काम करने का तरीका ही तरीका यह है कि जैसे घर से दे रहे हों। किसानों को प्रतिवर्ष 6000 रुपए देने के निर्णय पर भी उन्होंने कुछ इसी तरह का माहौल बनाया था।
2014 के लोकसभा चुनाव में जब मोदी को बीजेपी ने प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाया तो उन्होंने हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया। वह दूसरी बात है कि 2025 में भी उनके ये दोनों वादे पूरे न हो सके। मोदी जनता को सपने दिखाते रहे और जनता उनके बहकावे में आती रही। बीजेपी ने बड़ी चालाकी से देश में हिन्दू-मुस्लिम का माहौल बनाए रखा। 2019 और उसके बाद 2024 का चुनाव भी मोदी जीत गए। वह बात दूसरी है कि स्मार्ट सिटी और स्मार्ट विलेज बनाने का वादा भी उनका खोखला ही साबित हुआ।
2011 से मोदी विदेश दौरे कर रहे हैं। भारतीय मूल के लोगों से मिलने और अडानी के लिए बिजनेस डील कराने के अलावा वह कुछ खास न कर सके। यहां तक कि जिन डोनाल्ड ट्रम्प के लिए वह अबकी बार ट्रंप सरकार के नारे लगाए आए। नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम करा उनके स्वागत में 100 करोड़ रुपए फूंक कर अभी वह ट्रंप को साध न सके। मोदी ट्रम्प को अपना मित्र कहते रहे और ट्रंप मोदी के साथ ही देश को भी अपमानित करता रहा। 50 प्रतिशत टैरिफ, एच-1 बी वीजा 88 लाख में कर दिया। हमारे नागरिकों को हाथ में हथकड़ी और पैर में बेड़िया डालकर भारत भेजा गया।
जनता बेचारी करे भी तो क्या करे। मीडिया तो सरकार का भोंपू बना हुआ है। उसका काम तो  तो मोदी की कमियां छुपाकर सरकार की तारीफ में ख़बरें दिखाना और चलाना रह गया है। लोगों को लगता है कि देश में बहुत काम हो रहे हैं। जनता बेचारी को क्या पता कि देश अंदर से खोखला होता जा रहा है। मतलब मीडिया के सत्ता का प्रवक्ता बनने के चलते लोगों तक जमीनी हकीकत नहीं पहुंच पा रही है।
Exit mobile version