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तो बदल गई सपा पीडीए की परिभाषा, पी मतलब हो गया पूंजीपति ?

कॉरपोरेट कल्चर में ढलती अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी !

एनडीए के सांसद परिमल नथवाणी के बेटे धनराज नथवाणी को बनाया राज्यसभा प्रत्याशी

मुकेश अंबानी के करीबी और रिलायंस ग्रुप से जुड़े हैं धनराज नथवाणी!

चरण सिंह 
क्या धनराज नथवाणी समाजवाद का बड़ा चेहरा हैं ? क्या धनराज समाजवादी चिंतक या विचारक हैं ? क्या धनराज कोई समाजसेवी हैं ? क्या धनराज ने ऐसा कोई काम किया है जिनको राज्यसभा में भेजने पर अखिलेश यादव की वाहवाही होगी ? क्या धनराज राज्य सभा में जाकर  जनहित के मुद्दे उठाएंगे ? क्या धनराज समाजवादी पार्टी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे ? तो फिर अखिलेश यादव का धनराज को राज्यसभा में भेजने का क्या कारण हो सकता है ? ऐसे में प्रश्न उठता है कि किसी पूंजीपति को राज्य सभा में भेजने पर पिछड़े दलित और अल्पसंख्यक की बात कैसे की जा सकती है ? गत दिनों कपिल सिब्बल भी सपा की मदद से राज्य सभा पहुंचे थे।
समाजवादी पार्टी के होने वाले सांसद के बारे में थोड़ा जान भी लीजिये। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार धनराज नथवाणी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। वह द्वारकाधीश मंदिर प्रशासनिक समिति के उपाध्यक्ष, गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और प्रभारी अध्यक्ष और जामनगर फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। वे मुकेश अंबानी और उनके बच्चों के सबसे करीबी विश्वासपात्रों में से एक हैं। समझा जा सकता है कि राज्य सभा में जाकर वह क्या करेंगे ?
ऐसा नहीं है कि समाजवादी पार्टी ही कोई किसी पूंजीपति को राज्यसभा भेज रही हो। देश की राजनीति को बदलने का दम्भ भरने वाली आम आदमी पार्टी भी जब राज्य सभा में आवाज बनने की स्थिति में आई तो अपने दो स्वजातीय बंधु भेज दिए। जो दोनों आज बीजेपी के पाले में हैं। जबकि उस समय कुमार विश्वास और आशुतोष दोनों ही जमीनी मुद्दे उठाने वाले नेता आम आदमी के पास थे। जिन्हें कभी राज्य सभा में कोई जनहित का मुद्दा नहीं उठाते देखा गया।

बीजेपी पर तो पूंजीपतियों से सांठगांठ कर राजनीति करने का आरोप है पर लगभग सभी पार्टियां पूंजीपतियों के दम पर राजनीति कर रही हैं। सत्ता में आने के बाद इन पूंजीपतियों के लिए ही काम करती हैं। पीएम मोदी की राजनीति में गौतम अडानी ने मदद की तो आज पीएम मोदी अडानी के दबाव से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। वह जनता के भले के लिए कम और अडानी के भले के लिए ज्यादा काम कर रहे हैं।

समाजवाद के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया की नीतियों का अनुसरण करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के प्रिय शिष्य मुलायम सिंह यादव ने जीते जी समाजवाद का रास्ता नहीं छोड़ा। भले ही उनके सारथी अमर सिंह रहे हों, भले ही उन पर परिवारवाद का आरोप लगता रहा हो पर चाहे राज्य सभा की बात हो या फिर विधान परिषद् की।
उन्होंने प्राथमिकता पार्टी कार्यकर्ता को ही दी। सुरेंद्र नागर भी जब राज्य सभा में भेजे गए थे तो ऐसी ख़बरें मार्किट में आई थीं कि नेताजी ने अखिलेश यादव के हस्तक्षेप पर उन्हें राज्य सभा  भेजा था। हालांकि सपा के कद्दावर नेता रहे आजम खान के परिवार की बर्बादी पर पार्टी की ओर से कोई खास स्टैंड न लेने पर राजनीति की समझ रखने लोगों ने समझ लिया था कि पार्टी अब किस ओर जा रही है।
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने जिस तरह से धनराज परिमल नथवाणी को उम्मीदवार बनाया है उससे स्पष्ट लगने लगा है कि पार्टी पर अब कॉरपोरेट कल्चर हावी होने वाला है। बिजनेस के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाने वाले धनराज नथवाणी रिलायंस ग्रुप से जुड़े हैं। साथ ही, क्रिकेट जगत में भी उन्होंने खूब नाम कमाया है। धनराज पहले गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं।

धनराज नथवाणी राज्यसभा सांसद और रिलायंस ग्रुप के सीनियर अधिकारी परिमल नथवाणी के बेटे हैं। गत जून में ही परिमल नथवाणी झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते और राज्यसभा सदस्य बने। इससे पहले वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद रहे हैं। रिलायंस समूह में परिमल नथवाणी बतौर डायरेक्टर ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

दरअसल उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। इसके लिए अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी चार पर्चे खरीदे हैं, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 8 पर्चे लिए हैं। मतदान के बाद उसी दिन शाम पांच बजे तक चुनाव के परिणाम आ जाएंगे।

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