Silver Price Crash: ₹200000 से ज्यादा सस्ती मिल रही चांदी; रिकॉर्ड हाई से 46% टूटी!

चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी के बाद अब उतनी ही बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। जनवरी 2026 में चांदी की कीमत अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। उस समय चांदी का भाव प्रति किलो 4,40,000 रुपये तक चला गया था। इसके बाद चांदी में ऐसी गिरावट आई कि अभी तक संभल नहीं पाई है। अपने पीक से चांदी इस समय प्रति किलो 2 लाख रुपये से ज्यादा गिर गई है। यानी इसमें 45 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। एमसीएक्स पर शुक्रवार को चांदी का भाव प्रति किलो 2,37,499 रुपये पर बंद हुआ। ऐसे में चांदी का भाव अपने ऑल टाइम हाई के मुकाबले 2,02,501 रुपये नीचे आ गया है। यानी चांदी में 46 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि पिछले कुछ समय से इसमें उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन कीमतों में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है।

चांदी केवल एक कीमती धातु नहीं है, बल्कि इसका 50% से 60% उपयोग उद्योगों (सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स) में होता है। 3-4 गुना दाम बढ़ने के बाद उद्योगों ने इसके विकल्प तलाशने शुरू कर दिए, जिससे मांग प्रभावित हुई। चांदी ने 2025 से 2026 की शुरुआत के बीच करीब 350% की अभूतपूर्व तेजी दिखाई थी। इतनी बड़ी रैली के बाद सट्टेबाजी को रोकने के लिए एक्सचेंजों द्वारा मार्जिन बढ़ाए गए, जिससे निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड्स का रुख किया। जब डॉलर मजबूत होता है, तो कमोडिटीज पर दबाव बनता है। चीन और अमेरिका के फंड हाउसेज का जो शॉर्ट-टर्म (सट्टेबाजी वाला) पैसा चांदी में लगा था, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते ही वह तेजी से बाहर निकल गया। सोने को दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का सहारा मिलता है, जिससे वह सुरक्षित रहता है। चांदी के साथ ऐसा नहीं है।

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