हर आंदोलन में नक्सली का एक नया शब्द तैयार कर लेते हैं मोदी
नक्सली, अर्बन नक्सली और अब दिमागी नक्सली, अभी और ईजाद करेंगे शब्द ?
चरण सिंह
वाह भाई वाह। जो काम अब तक कोई नहीं कर पाया था वह प्रधानमंत्री जी ने कर दिखाया। कोई नक्सली के प्रकार नहीं बता रहा था। हमारे प्रधानमंत्री हर आंदोलन पर नक्सली का एक नया शब्द इजाद कर लेते हैं। अब तो प्रधानमंत्री जी से नक्सलियों पर पाठ पढ़ना चाहिए। नक्सलियों के प्रकार जानने चाहिए। तीन प्रकार तो उन्होंने बता दिए हैं। अब देखते हैं कितने और प्रकार बताएंगे।
आम आदमी पार्टी के लिए उन्होंने नक्सली शब्द निकाला तो किसान आंदोलन में सोशल एक्टिविस्टों के लिए अर्बन नक्सली। अब दिल्ली जंतर मंतर पर जेन जी के आंदोलन के बाद स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले के प्राचीर से ध्वजारोहण करते हुए सरकार का नीतिगत विरोध करने वाले पढ़े लिखे लोगों के लिए दिमागी नक्सली कहा। देश में अब आंदोलन तो बहुत होने हैं तो क्या प्रधानमंत्री के नक्सली के प्रकार और बढ़ेंगे ?
बीजेपी ने पहले हिन्दू मुस्लिम को लेकर लोगों में नफरत पैदा की। यूजीसी एक्ट के माध्यम से सामान्य और ओबीसी-एससी एसटी में नफरत पैदा करने के बीज पैदा कर दिए गए। बीजेपी के लिए दिक्कत यह पैदा हो गए जिस यूथ को उसने जाति और धर्म के नाम पर बांटने की रणनीति तैयार की थी उस यूथ ने एकजुट होकर जाति और धर्म से ऊपर उठकर सरकार को ललकार दिया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया।
जो लोग बीजेपी को हिन्दू-मुस्लिम में नफरत पैदा करने वाली पार्टी समझते हैं। वह यह भलीभांति समझ लें कि बीजेपी को हर उस व्यक्ति से दिक्कत है जो बीजेपी की नीति की आलोचना करता हो। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की आलोचना तो जैसे अपराध हो। जो व्यक्ति बीजेपी नेतृत्व की आलोचना करे वह बीजेपी के लिए नक्सली, अर्बन नक्सली, दिमागी नक्सली, आतंकवादी, देशद्रोही जाने क्या क्या हो जाएगा।
सड़क से लेकर सदन तक की भाषा ख़राब कर दी गई। बिगड़ी भाषा को लेकर लोग चिल्लाते रहे पर बीजेपी नेताओं पर कोई असर नहीं हुआ। खुद प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की एक बड़ी नेता के लिए जर्सी गाय तक तह डाला पर किसी को इस भाषा से कोई दिक्कत नहीं हुई। अब जब प्रधानमंत्री को लेकर दिल्ली जंतर मंतर पर हुए जेन जी के आंदोलन में गाली दी गई तो सभी की आंखें खुल गई। सबको भाषा में गड़बड़ी नजर आने लगी। खुद प्रधानमंत्री ने वीडियो जारी कर गाली देने वाले छात्रों को माफ़ करने की बात कही। वह बात दूसरी है कि मणिपुर में दो लड़कियों की न्यूड परेड का भी प्रधानमंत्री पर कोई असर नहीं पड़ा था। लोग चिल्लाते रहे पर प्रधानमंत्री जी शायद मणिपुर को अपने देश का हिस्सा ही नहीं मान रहे थे।
जमीनी हकीकत तो यह है कि किसी को भी गाली देने पर हर सभ्य व्यक्ति उसकी आलोचना करेगा पर राजनीति के क्षेत्र में गालियों की भाषा तो खुद बीजेपी नेताओं नहीं शुरू की थी। बीजेपी के एक सांसद ने लोकसभा में ही एक सांसद को आतंकवादी तक कह दिया था पर किसी को यह गाली सुनाई दी। मौजूदा हालात में बीजेपी की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उसने जो लोगों के मन में डर बैठाया था। प्रधानमंत्री का जो ओरा तैयार किया गया था उसकी हवा जेन जी ने निकाल दी है। अब चारों ओर से केंद्र के साथ ही राज्य सरकारों की आलोचना हो रही है। छोटे छोटे बच्चे अपना हक़ मांगने लगे हैं। तो क्या बच्चों में डर पैदा करने के लिए यह दिमागी नक्सली शब्द प्रधानमंत्री जी ने ईजाद किया है ?

