दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (17 जुलाई) को फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश मामले में आरोपी छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त तय की गई है।
शरजील की दलील- 6 साल बाद भी मामले में आरोप तय नहीं
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच शरजील इमाम की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने 4 जुलाई को ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
शरजील इमाम की ओर से कहा गया कि उनकी गिरफ्तारी को करीब छह साल हो चुके हैं। लेकिन अब तक मामले में आरोप भी तय नहीं हो सके हैं. याचिका में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट को उनकी नियमित जमानत अर्जी पर स्वतंत्र रूप से विचार करना चाहिए था. लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
शरजील इमाम की ओर से कहा गया कि उनकी गिरफ्तारी को करीब छह साल हो चुके हैं। लेकिन अब तक मामले में आरोप भी तय नहीं हो सके हैं. याचिका में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट को उनकी नियमित जमानत अर्जी पर स्वतंत्र रूप से विचार करना चाहिए था. लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही मामले में खारिज कर चुका है याचिका
ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर चुका है. ऐसे में उसके पास इस अर्जी पर सुनवाई करने या राहत देने का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने जमानत अर्जी को सुनवाई योग्य भी नहीं माना।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शरजील इमाम को 25 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर यूएपीए के तहत फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश के मास्टरमाइंड्स में शामिल होने का आरोप है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. यह हिंसा नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की थी।
शरजील इमाम और उमर खालिद के खिलाफ UAPA में बनता है मामला
इस साल 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. हालांकि इसी मामले में सह-आरोपी गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत मिल गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शरजील इमाम और उमर खालिद के खिलाफ यूएपीए के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है और सभी आरोपियों की भूमिका एक जैसी नहीं मानी जा सकती।

