भारत वृद्ध आबादी के साथ विकसित भी होगा और समृद्ध भी : मिथलेश नंदिनी शरण जी महाराज
लक्ष्मीबाई कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग
Elderly Care in Viksit Bharat @2047:Policies and Programmes for Dignified Life” (विकासशील देशों में वृद्धों की देखभाल, @2047: सम्मानजनक जीवन के लिए नीतियाँ और कार्यक्रम”) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया.
इस संगोष्ठी का आयोजन,राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान,सामाजिक न्याय व अधिकारीता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment, New Delhi) के सहयोग से किया जा रहा है.
इस संगोष्ठी में डॉ.सुनील कुमार मिश्र व डॉ .स्वाती एस मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक ” Old Is गोल्ड ” का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया.प्रतिभागियों के संक्षिप्त पेपर के आधार पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया.
इस संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में स्वागत वक्तव्य देते हुए कॉलेज की प्राचार्या प्रो. लता शर्मा ने ऐसे आयोजनों की प्रासंगिकता को बताते हुए इस सत्र के गणमान्य अतिथियों के साथ सभी का स्वागत किया.
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेज प्रो.बलराम पाणी ने आज के आयोजन की उपादेयता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक विकास के लिए जरूरी हैं.सामाजिक विकास आपसी सहयोग से ही संभव है.
विशिष्ट अतिथि, पर्यटन व संस्कृति विभाग की सचिव, दिल्ली सरकार IAS अधिकारी रश्मि सिंह ने अपने वक्तव्य में सामाजिक और सरकारी सेवाओं को समाजशास्त्र से जोड़कर उसकी उपयोगिता को रेखांकित किया.
विशिष्ट अतिथि भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संगठन सचिव सुरेश जैन ने इस बात पर बल दिया कि समूची वसुधा को एक दृष्टि से देखना आज की जरूरत है.संस्कारित मन से समाज का कल्याण किया जा सकता है. क्योंकि सेवा के माध्यम से ही समाज को संस्कारित किया जा सकता है.
इस संगोष्ठी के मुख्य वक्ता श्री स्वामी मिथलेश नंदनी शरण ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों के समूचे योगदान को ध्यान में रखते हुए उनका सम्मान करना चाहिए.आज के दौर की जरूरत है परिवारिक सामंजस्य.परिवार का उपस्थित रहना किसी भी विकसित समाज की आधार भूमि है,विषय रखते कहा की हमें वृद्धों के प्रति होने वाले व्यवहार को अस्पृश्य के रूप में देखना होगा.
विशिष्ट अतिथि बीएचयू के प्रो.अरविंद जोशी ने कहा कि आज के समय में लोगों को वरिष्ठता बोध से बचना चाहिए.वरिष्ठता बोध शारीरिक से ज्यादा मानसिक विकास पर निर्भर करता है.आज हमें वरिष्ठ लोगों के अधिकारों को बचाने की जरूरत है. विशिष्ट अतिथि बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने सामाजिक संबंधों पर बल देते हुए कहा कि संस्कार खुद बनाने से आते हैं.सभी वर्गों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी स्वीकारना चाहिए.विशिष्ट अतिथि इंडिया टीवी के चीफ एडिटर अरविंद चतुर्वेदी ने अपने पत्रकारिता के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि हमें अपने बुजुर्गों के साथ समय देना चाहिए.कुछ उनकी सुनें,कुछ उनको सुनाएं.विशिष्ट अतिथि पूर्व डीजी डॉ.विष्णु चंद्रा ने कहा कि पहले से बने हुए नियम या नीतियों को सामाजिक विकास से जोड़कर देखा जाना चाहिए.आज के समय में मूल्यों को बचाने की जरूरत है.
उक्त अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय से प्रो.प्रमोद गुप्त जी,बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय से प्रो.सनत कुमार शर्मा, गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्रो. प्रमोद कुमार शुक्ल, डॉ .अमित भौमिक पश्चिम बंगाल, प्रो.संजय तिवारी कानपुर, प्रो.बी के नागला कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, डॉ.अभिषेक त्रिपाठी, डॉ.नीरज कुमार मिश्र दिल्ली विश्वविद्याल, केन्द्रीय विश्वविद्यालय पंजाब, सहित अनेक शोधार्थी व प्रतिभागी उपस्थित थे ।
प्रो.अनीता मल्होत्रा, डॉ.प्रमिला,प्रो. सुनीता अरोड़ा, प्रो. सीमा शर्मा कौशिक, डॉ.स्वाती एस मिश्र, डॉ.अदिती नारायणी पासवान उपस्थित थे।
इस सत्र में डॉ. निधि बाल्यान ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और इस सत्र का संचालन सेमिनार के संयोजक डॉ.सुनील कुमार मिश्र ने किया।इस सत्र में कई गणमान्य व्यक्तियों के साथ कॉलेज के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में गरिमामय उपस्थिति रही








