केसी त्यागी पर कैंची और पशुपति पारस की अमित शाह से मीटिंग, महज संयोग या बीजेपी का मैसेज क्लियर है?

 पटना/नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में पिछले सप्ताह दो बड़े घटनाक्रम हुए। सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस की मुलाकात गृहमंत्री अमित शाह से हुई। वहीं सप्ताह के अंत में वरिष्ठ समाजवादी नेता केसी त्यागी ने जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। इन दोनों घटनाक्रम को लेकर बिहार के चट्टी चौराहों से लेकर पटना के राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। दोनों घटनाओं को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
केसी त्यागी के जेडीयू के प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना और पशुपति पारस की अमित शाह से मुलाकात की घटनाओं में एक समानता दिखती है। पिछले दिनों केसी त्यागी ने बिहार के प्रमुख अखबारों में एक आर्टिकल लिखा था, जिसमें वह काफी हद तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की नीतियों का समर्थन करते दिखे थे। खासकर केसी त्यागी ने राहुल गांधी की ओर से उठाए जा रहे जातीय सर्वेक्षण और आरक्षण को सही ठहराया था। आर्टिकल में केसी त्यागी ने इन दोनों मुद्दों को मौजूदा दौर की मांग बताया था। इससे पहले केसी त्यागी ने बीजेपी और भारत सरकार की लाइन से अलग जाकर कहीं ना कहीं फिलीस्तीन का समर्थन किया था। केसी त्यागी ने इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध के मुद्दे पर विपक्ष के स्टैंड के साथ खड़े नजर आए थे। जेडीयू नेता ने इस बात का समर्थन किया था कि भारत को इजरायल की मदद नहीं करनी चाहिए।
केसी त्यागी ने इन दो घटनाओं के बाद अचानक व्यक्तिगत कारण बताकर राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। यहां ध्यान दिला दें कि केसी त्यागी जेडीयू के वह नेता हैं, जो दिल्ली में नीतीश कुमार के आंख कान के रूप में कार्य करते हैं। केसी त्यागी ही वह नेता हैं जो पटना और दिल्ली के बीच सूत्र का काम करते हैं। ऐसे में केसी त्यागी की लाइन केंद्र सरकार से अलग जाना खटकने वाला लगता है।
दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री और लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी केंद्र सरकार से इतर जाकर अपनी राय रखी। खासकर आरक्षण, जातीय सर्वेक्षण और लेटरल एंट्री जैसे अहम मुद्दों पर चिराग पासवान ने सरकार में रहते हुए अपनी पार्टी का अलग स्टैंड रखा। खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताने वाले चिराग पासवान का इस तरह के बयान ने सबका ध्यान खींचा। चिराग के इन बयानों के कुछ दिन बाद ही गृहमंत्री अमित शाह ने चिराग पासवान के चाचा और राष्ट्रीय लोकजनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस से दिल्ली में मुलाकात कर ली। लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं पाने वाले पशुपति पारस की पार्टी को 2025 में सम्मानजनक सीटें देने का भरोसा मिला है। इतना ही नहीं पटना में तेजी से खबर चर्चा में आई कि चिराग पासवान की पार्टी एक बार फिर से टूटने वाली है। यहां तक खबरें आई कि चिराग की पार्टी के तीन सांसद बीजेपी के संपर्क में हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केसी त्यागी का पद से हटना और पशुपति पारस से अमित शाह की मुलाकात केवल संयोग मात्र नहीं है। इसके पीछे बीजेपी ने अपना संदेश साफ कर दिया है। माना जा रहा है कि बीजेपी ने साफ संकेत देने की कोशिश की है कि भले ही वह केंद्र में गठबंधन की सरकार चला रही है, लेकिन पॉलिसी मैटर पर वह अलग लाइन बर्दाश्त नहीं करेगी।
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है। 18वीं लोकसभा के गठन के बाद एनडीए संसदीय दल की पहली बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी घटक दलों के प्रवक्ताओं के बीच समन्वय होने की बात पर जोर दिया दिया था। कहा था कि इससे सरकार की बात एक सुर में जनता तक जाएगी। लेकिन हाल के दिनों में कई बार ऐसा हुआ, जब एनडीए के घटक दलों का स्टैंड भी सरकार की लाइन से अलग और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के करीब नजर आया।

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