सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा। याचिकाकर्ता ने संशोधनों को चुनौती दी है, जो कथित तौर पर सख्त सजा, अस्पष्ट परिभाषाएं, और जमानत की कठिन शर्तें लागू करते हैं। इस कानून में गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के लिए 20 साल तक की सजा या उम्रकैद और गंभीर अपराधों की श्रेणी में शामिल करने जैसे प्रावधान हैं।
राज्य ने तर्क दिया कि इस तरह के मामले मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अन्य समान याचिकाओं के साथ जोड़ने पर विचार करने का संकेत दिया है। अगली सुनवाई की तारीख अभी निर्धारित नहीं की गई है।
यह जानकारी हाल के समाचारों और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर आधारित है। मामले की प्रगति पर अधिक जानकारी के लिए सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय समाचार स्रोतों का अनुसरण करें।

