आंदोलन के चलते बंद हुआ टीवी चैनलों का काम
नोएडा। सहारा इंडिया टीवी नेटवर्क, नोएडा में कार्यरत कर्मचारियों ने वर्षों से लंबित वेतन भुगतान को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। कर्मचारियों ने जिला प्रशासन, श्रम विभाग और सहारा प्रबंधन को एक पत्र सौंपते हुए 17 जुलाई 2025 से टीवी चैनल परिसर के बाहर शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी है।

कर्मचारियों का आरोप है कि जनवरी 2014 से उन्हें नियमित वेतन नहीं मिला है। इस दौरान केवल “टोकन मनी” के रूप में नाममात्र की राशि दी गई, जो अब घटकर 30-40% रह गई थी और बीते तीन महीने से वह भी पूरी तरह बंद है।
दरअसल टीवी चैनल के कर्मचारी सहारा मीडिया के परिसर में शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। इन आंदोलनकारियों ने काम भी जारी कर रखा था। चैनल के विभिन्न विभागों की चाबी इन आंदोलनकारियों के पास ही थी। कल रात प्रबंधन ने इन चाबियों को इन आंदोलनकारियों से अपने कब्जे में लेकर इन्हें परिसर से बाहर आंदोलन करने को कह दिया है। जानकारी मिली है कि सुमित राय ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि संस्था जब 4000 केस झेल रही है तो फिर 100 केस और सही। उधर कर्मचारी भी आर पार के मूड में हैं। किस भी हालत में उन्हें अपना भुगतान चाहिए। जानकारी यह भी मिली है कि अब प्रबंधन गार्डों के जरिए आंदोलनकारियों को चाबी दे रहा है पर आंदोलनकारियों ने चाबी लेने से इनकार कर दिया है। चाबी देने के बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि तीन करोड़ का विज्ञापन आया हुआ है जो कर्मचारियों ने चलाने से इंकार कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक वेतन नहीं मिलेगा तब तक वे विज्ञापन नहीं चलाएंगे।
दरअसल 2015 से वेतन को लेकर समय समय पर सहारा मीडिया में आंदोलन होता रहा है। जब 4 मार्च 2014 को सुब्रत राय को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब कुछ दिन बाद ही सहारा मीडिया (प्रिंट और टीवी चैनल) के कर्मचारियों को वेतन मिलने में दिक्कत आने लगी थी।
दरअसल सहारा मीडिया में काम कर रहे कर्मचारियों का बकाया भुगतान भी काफी हो चुका है। वेतन भी टोकन मनी के रूप में मिल रहा है। बीच-बीच में आंदोलन होता है और आश्वासन पर मामला शांत हो जाता है। इस बार टीवी के कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। देखने की बात यह है कि इसी बीच सुब्रत राय का निधन भी हो चुका है।
सहारा इंडिया में निवेशकों और एजेंटों ने अलग से भुगतान को लेकर आंदोलन छेड़ रखा है। सहारा इंडिया में ऑल इंडिया जन आंदोलन संघर्ष न्याय मोर्चा, विश्व भारती जन सेवा संस्थान, रंग दे बसंती और ठगी पीड़ितों की आवाज समेत कई संगठन निवेशकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। मामला सड़क से लेकर कोर्ट तक चल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि धीरे धीरे सहारा अपनी संपत्ति बेचता जा रहा है पर कमर्चारियों और निवेशकों के भुगतान के लिए इसके पास पैसे नहीं है। उधर सहारा निवेशक भी देशभर में आंदोलन पर हैं। सहारा प्रबंधन धीरे धीरे अपनी संपत्ति बेचने में लगा है पर न तो निवेशकों का भुगतान कर रहा है और न ही कर्मचारियों का। प्रबंधन के खर्चे में कोई कमी नहीं है।

