चरण सिंह
केजरीवाल एंड टीम भले ही पंजाब में सक्रिय नजर आ रही हो पर रेखा गुप्ता के लिए सरकार चलाना इतना आसान नहीं है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के लिए बड़ी चुनौती तो महिला समृद्धि योजना को लागू करना है। जब खुद रेखा गुप्ता कह रही हैं कि दिल्ली का खजाना खाली है तो फिर प्रत्येक महिला को 2500 रुपए कैसे दे पाएंगी ?
मान लिया जाए कि सरकारी नौकरीपेशा और पेंशन लेने वाली महिला को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा फिर भी हर परिवार में एक से दो महिला है। मतलब 5 हजार से लेकर 20 हजार रुपए प्रत्येक परिवार को देने पड़ेंगे। बीजेपी ने चुनावी खुमारी में केजरीवाल को हराने के लिए फ्री की सभी योजनाओं को जारी रहने और महिलाओं को 2500 रुपए प्रतिमाह देने का वादा तो कर दिया था पर इस पर खरा उतरना मुश्किल होगा।
भले ही महिला दिवस 8 मार्च को इस योजना को लागू करने की बात की जा रही हो पर लग नहीं रहा है कि दिल्ली में यह योजना पूरी तरह से लागू हो पाएगी। योजना लागू न होने की बड़ी वजह यह भी है कि इस योजना का अधिकतर जिन महिलाओं को लाभ होगा वे आम आदमी पार्टी का वोटबैंक मानी जाती हैं। वैसे भी बीजेपी इन फ्री की योजनाओं को फ्री की रेबड़ी की संज्ञा देती रही है। यह भी जमीनी हकीकत है कि रेखा गुप्ता का दारोमदार भी महिला समृद्धि योजना पर ही है। यदि यह योजना सही ढंग से लागू न हो पाई तो बीजेपी को यह भी समझ लेना चाहिए कि महिलाओं की नाराजगी उन्हें भारी भी पड़ सकती है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि केजरीवाल फ्री की योजनाओं को कैसे लागू कर देते थे।
दरअसल केजरीवाल बसों में फ्री सफर, बिजली की 200 यूनिट फ्री देते रहे। महिलाओं को 2500 रुपए प्रति माह देना टेढ़ी खीर है। जिस महिला को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वह महिला बीजेपी का दुष्प्रचार करेगी, क्योंकि आम आदमी पार्टी महिलाओं का वोट लेती रही है। इसलिए खुलकर इनके लिए फ्री की योजनाएं लाती थी। देखने की बात यह है कि आम आदमी पार्टी का वोट प्रतिशत ज्यादा कम नहीं हुआ है।
एक डेढ़ प्रतिशत का खेल है। ऐसे में बीजेपी का प्रयास होगा कि अपने वोटबैंक को भी कुछ फायदा हो। दिल्ली में फ्री की योजनाएं बीजेपी के लिए एक आफत भी बन सकती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि दिल्ली में फ्री की योजनाएं लागू होते ही बीजेपी शासित दूसरे राज्यों में भी इन योजनाओं को लागू करने की मांग उठने लगेंगी। ऐसे में बीजेपी के सामने बड़ी समस्या आ सकती है।

