संसद की दीवारों से
कैसी सुगबुगाहट है ..
सत्ता के गलियारों में
अजीब घबराहट है ..
क्या यह तख्तापलट
की आहट है ..
ख़ामोश जुबा पे जाग उठी
एक नयी तरुणाहट है ..
मज़लूम गलियों में भी
अजीब जगमगाहट है ..
क्या यह तख्तापलट
की आहट है ..
देख मुलाजिमों की मुस्कुराहट
सत्ता के गलियारों में
अजीब घबराहट है ..
क्या यह तख्तापलट
की आहट है ..
संसद की दीवारों से
कैसी सुगबुगाहट है ..
सत्ता के गलियारों में
अजीब घबराहट है ..
क्या यह तख्तापलट
की आहट है ..
केएम भाई

