IIMUN युवाओं की ओर से संचालित एक मंच है, जो भारत में 275 शहरों और 40 से अधिक देशों में फैला हुआ है। आरएसएस के मुताबिक इस संगठन की स्थापना साल 2011 में हुई थी, जिसे 15 से 24 साल के युवा संचालित करते हैं। इसके अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से अब तक 7.5 करोड़ से अधिक युवा और 1.5 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज जुड़ चुके हैं।
हाल ही में दिल्ली में हुए प्रदर्शन का मुद्दा सड़क से लेकर संसद तक गूंज रहा है। विपक्ष ने इसे Gen-Z आंदोलन करार दिया था। कांग्रेस समेत विपक्षी दल का कहना है कि Gen-Z ने सरकार को मजबूर कर दिया, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 5 बार इंटाग्राम पर Gen-Z से डायरेक्ट बात कर चुके हैं।
इससे पहले मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति और समाज में बदलते मूल्यों को लेकर कहा कि समय के साथ बदलना भी मातृत्व का एक महत्वपूर्ण पहलू है. जीवन में परिवर्तन स्वाभाविक प्रक्रिया है और मनुष्य अपने अनुभवों से लगातार सीखता रहता है। सीखने के कई माध्यम होते हैं. यदि मार्गदर्शन उपलब्ध हो तो व्यक्ति सहज रूप से आगे बढ़ता है, लेकिन कई बार अनुभव ही सबसे बड़ा शिक्षक बनता है। हालांकि अनुभव से मिलने वाली शिक्षा कठिन होती है, फिर भी वह जीवनभर साथ रहती है।
उन्होंने कहा था, ‘मां का स्नेह और भावनात्मक सहयोग केवल बचपन तक सीमित नहीं होता. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वह कई बार मां की बातों का विरोध भी करता है, लेकिन इसके बावजूद मां का रिश्ता सबसे अलग और स्थायी रहता है। जीवन के हर चरण में व्यक्ति को भावनात्मक सहारे की आवश्यकता होती है और मां वह स्थान होती है, जहां व्यक्ति बिना किसी संकोच के अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकता है.’RSS का बड़ा प्लान! 100 से ज्यादा शहरों के Gen Z से संवाद करेंगे भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत 6 अगस्त को देश युवाओं से बातचीत करेगे, आरएसएस ने बताया कि वह मुंबई में देश के Gen-Z और Gen Alpha को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम ‘इण्डियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (I.I.M.U.N.) की 15वीं वर्षगांठ और उसकी वार्षिक चैंपियनशिप कांफ्रेंस के उद्घाटन समारोह के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है. इस सम्मेलन में देश भर के 100 से अधिक शहरों से 15 से 19 साल के 2,000 से भी अधिक स्टूडेंट्स हिस्सा लेंगे।
IIMUN युवाओं की ओर से संचालित एक मंच है, जो भारत में 275 शहरों और 40 से अधिक देशों में फैला हुआ है। आरएसएस के मुताबिक इस संगठन की स्थापना साल 2011 में हुई थी, जिसे 15 से 24 साल के युवा संचालित करते हैं. इसके अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से अब तक 7.5 करोड़ से अधिक युवा और 1.5 लाख से अधिक स्कूल-कॉलेज जुड़ चुके हैं।
हाल ही में दिल्ली में हुए प्रदर्शन का मुद्दा सड़क से लेकर संसद तक गूंज रहा है। विपक्ष ने इसे Gen-Z आंदोलन करार दिया था. कांग्रेस समेत विपक्षी दल का कहना है कि Gen-Z ने सरकार को मजबूर कर दिया, इसलिए धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 5 बार इंटाग्राम पर Gen-Z से डायरेक्ट बात कर चुके हैं।
इससे पहले मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति और समाज में बदलते मूल्यों को लेकर कहा कि समय के साथ बदलना भी मातृत्व का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जीवन में परिवर्तन स्वाभाविक प्रक्रिया है और मनुष्य अपने अनुभवों से लगातार सीखता रहता है. सीखने के कई माध्यम होते हैं. यदि मार्गदर्शन उपलब्ध हो तो व्यक्ति सहज रूप से आगे बढ़ता है, लेकिन कई बार अनुभव ही सबसे बड़ा शिक्षक बनता है. हालांकि अनुभव से मिलने वाली शिक्षा कठिन होती है, फिर भी वह जीवनभर साथ रहती है।
उन्होंने कहा था, ‘मां का स्नेह और भावनात्मक सहयोग केवल बचपन तक सीमित नहीं होता. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वह कई बार मां की बातों का विरोध भी करता है, लेकिन इसके बावजूद मां का रिश्ता सबसे अलग और स्थायी रहता है. जीवन के हर चरण में व्यक्ति को भावनात्मक सहारे की आवश्यकता होती है और मां वह स्थान होती है, जहां व्यक्ति बिना किसी संकोच के अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकता है।

