नई दिल्ली/पटना। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में लोकसभा में एक बहस के दौरान सेना में जातिगत प्रतिनिधित्व को लेकर बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत की लगभग 10% आबादी (जिसका इशारा ऊपरी जातियों की ओर था) सेना के उच्च पदों पर कंट्रोल रखती है, जबकि ओबीसी, एससी और एसटी जैसी वंचित जातियों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। उनका कहना था कि यह असमानता लोकतंत्र के लिए खतरा है और सरकार को जाति-आधारित जनगणना करानी चाहिए। यह बयान 4 नवंबर 2025 को संसद में विशेष बहस के दौरान आया, जो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का पहला रिएक्शन
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने उसी बहस के दौरान तुरंत जवाब दिया, जो उनका पहला आधिकारिक रिएक्शन माना जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को “सेना की एकता को कमजोर करने वाली कोशिश करार दिया। हमारी सेना में भर्ती और प्रमोशन पूरी तरह से मेरिट, कड़ी मेहनत और देशभक्ति पर आधारित हैं। यहां जाति, धर्म या क्षेत्र का कोई स्थान नहीं है। ऐसे बयान देकर आप सैनिकों के मनोबल को ठेस पहुंचा रहे हैं, जो सीमाओं पर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। सरकार जाति-आधारित विभाजन को कभी बढ़ावा नहीं देगी।

