जांच सौंपी गई उसी खण्ड अधिकारी को, शिकायतकर्ता बोला सही पाए जाने के बाद भी दबा दी गई रिपोर्ट
तीन साल से जमे खंड शिक्षा अधिकारी पर फर्जी आख्या, कूटरचना व दबाव की चर्चा प्रशासनिक चुप्पी से बढ़े सवाल
आलापुर अम्बेडकरनगर। अम्बेडकर नगर के विकासखंड जहांगीरगंज स्थित ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) देवरिया बुजुर्ग क्षेत्र में, मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) योजना के संचालन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय नरियांव के विद्यालय के एमडीएम खाते से वर्ष 2021 से लेकर मार्च 2025 के बीच कथित रूप से एक व्यक्ति के द्वारा तीन लाख रुपये से अधिक की धनराशि विभिन्न तिथियों में चेक के माध्यम से निकाले जाने की शिकायत की गई है।आरोप है कि निकासी ऐसे व्यक्ति के जरिए कराई गई, जो न तो विद्यालय का कर्मचारी है, न अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और न ही खाद्यान्न आपूर्ति से जुड़ा अधिकृत दुकानदार। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि आखिर किसके सहयोग और अनुमति से सरकारी योजना की धनराशि का आहरण हुआ।
यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।जांच हुई, गड़बड़ी सही पाई गई, खण्ड़़ शिक्षा अधिकारी द्वारा फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा शिकायतों को दबाने में और कमियां को छुपाने में माहिर हैं, भ्रष्टाचार चरम पर है
ग्राम पंचायत मुबारकपुर पिकार निवासी पी.के. द्वारा उच्चाधिकारियों को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि मामले की शिकायत के बाद जांच खंड शिक्षा अधिकारी को ही सौंप दी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि एमडीएम खाते की जांच में अनियमितताएं सही पाई गईं, इसके बावजूद न तो कोई दंडात्मक कार्रवाई हुई और न ही रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया।आरोप है कि जांच प्रक्रिया को ही प्रभावहीन बनाकर प्रकरण को दबा दिया गया। यदि ऐसा हुआ है तो यह निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के विपरीत माना जाएगा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
लंबी तैनाती, भ्रामक आख्या और कूटरचना के आरोप, भ्रष्टाचार का बोलबाला है
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि खंड शिक्षा अधिकारी संतोष पांडेय लगभग तीन वर्षों से एक ही विकास खंड में तैनात हैं, जिसे स्थानांतरण नीति के व्दारा भी नहीं हुआ खण्ड़ शिक्षा क्षेत्र जहांगीरगंज बी आर सी पर लगभग तीन साल से जमे खंड शिक्षा अधिकारी। आरोप है कि एमडीएम अनियमितताओं की शिकायत पर उच्चाधिकारियों को भ्रामक व तथ्यहीन आख्या भेजी गई।इसके अतिरिक्त सेवा अभिलेखों में कूटरचना, एक ही अवधि में दो संस्थानों से संबद्धता दर्शाने तथा शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि विद्यालयों में भ्रष्टाचार या अनियमितता की आवाज उठाने वालों को कथित रूप से मानसिक दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।प्रशासनिक चुप्पी पर उठे प्रश्न मामला मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंचने के बावजूद अब तक किसी स्वतंत्र, उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच की घोषणा न होने से जिलाधिकारी, जिला प्रशासन और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
जनहित से जुड़ी योजना में कथित गड़बड़ी के बावजूद जवाबदेही तय न होना पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्चस्तरीय समिति से कराई जाए तथा यदि आरोप सिद्ध हों तो संबंधित अधिकारियों और अन्य दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब नजर शासन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है कि क्या इस बहुचर्चित प्रकरण में जवाबदेही तय होगी या मामला फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।

