चुनाव आयोग के आयुक्तों के बीच समन्वय की कमी की खबर के बीच, विपक्षी दलों के कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग की गरिमा को भंग करने का आरोप लगाया है। साथ ही उनका मानना है कि ज्ञानेश कुमार को संसद द्वारा तत्काल प्रभाव से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। अंग्रेजी दैनिक अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, चुनाव आयोग के दो आयुक्तों सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं. इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और प्रक्रियागत बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
आयोग के कुछ कदम “अनाधिकृत” और “अवैध”
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस खबर का उल्लेख करते ‘X’ पर पोस्ट कर कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग की ‘‘विश्वसनीयता और ईमानदारी’’ को नष्ट कर दिया है।
ब्रिटास ने कहा चुनाव आयोग ‘‘एक व्यक्ति के नियंत्रण’ में
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब ‘‘एक व्यक्ति के नियंत्रण’’ में है. उन्होंने ‘X’ पर पोस्ट कर कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए। ब्रिटास ने इस बात का उल्लेख कहा कि विपक्षी सांसदों ने 24 अप्रैल, 2026 को इस संबंध में नोटिस दिया था।
दरअसल, इस साल 24 अप्रैल को विपक्षी दलों के 73 राज्यसभा सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नया नोटिस सौंपा था। नोटिस में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए गए थे और संविधान के अनुच्छेद 324(5) सहित संबंधित प्रावधानों का हवाला दिया गया था।
ब्रिटास ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर भी उच्चतम न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज की हैं, तो एसआईआर की वैधता पर न्यायिक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग के मुद्दे पर ‘विपक्षी हों एकजुट’
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने ‘X’ पर कहा कि सभी विपक्षी दलों को पहले चुनाव आयोग से जुड़े इस मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को ‘‘व्यवस्थित’’ करने पर ध्यान देना चाहिए। ममता तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने भी चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की ‘‘खामियों और अव्यवस्था’’ की जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त की है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसके निर्देश पर नागरिकों को कथित तौर पर मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।

