प्रोफेसर राजकुमार जैन
25 जून 1975 में इंदिरा गांधी सरकार ने हिंदुस्तान में आपातकाल घोषित कर नागरिक अधिकारों पर बंदिश लगा दी थी, 19 महीने में उसको खत्म करने की मुनादी भी । हिंदुस्तान की जनता ने नए चुनाव में कांग्रेस पार्टी को धूल चटा दी। इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने के लिए माफी भी मांग ली। अब उससे उलट अघोषित आपातकाल नरेंद्र मोदी सरकार के राज में लागू है। मेरे जैसे लोगों ने पहले वाले आपातकाल में मीसाबंदी बनकर 19 महीने हिंदुस्तान की जेलों में बिताए थे तथा आज के अघोषित आपातकाल को भी अच्छी तरह देख रहा हूं। भारतीय जनता पार्टी योजना बनाकर पूरी ताकत के साथ मुल्क के पैमाने पर हर साल आपातकाल की यादगार तथा उसमें हुए अत्याचार की याद बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर आयोजन करती है, तथा उसका प्रयास होता है कि भाजपा के अतिरिक्त अन्य दलों के जो नेता, कार्यकर्ता आपातकाल में जेल गए थे उनको विशेष अतिथि का दर्जा देकर सम्मानित भी करती है। भाजपा बड़े सुनियोजित रूप में उस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए जुल्म तथा उनके बहादुर कारनामों का महिमा मंडित भी साथ-साथ करती है। मैं दिल्ली की तिहाड़ जेल तथा बाद में हिसार की केंद्रीय जेल में उस दौर में बंदी रहा हू। भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ लोगों को छोड़कर उसके नेता और कार्यकर्ता भयभीत होकर किसी भी कीमत पर जेल से निकलना चाहते थे। जेल में अक्सर उनका सोशलिस्टों से टकराव होता रहता था। सोशलिस्ट जेल में नारा लगाते थे
‘ दम है कितना दमन में तेरे
देख लिया और देखेंगे,
जगह है कितनी जेल में तेरे
देख लिया और देखेंगे’
जेल के फाटक टूटेंगे, सारे साथी छूटेंगे।
इंदिरा गांधी होश में आओ,
होश में तुमको आना होगा,
वरना तुमको जाना होगा। आपातकाल मुर्दाबाद,
इंकलाब जिंदाबाद, गांधी लोहिया जयप्रकाश,
वगैरा-वगैरा नारे जब सोशलिस्ट लगाते थे, भाजपा के कार्यकर्ता कहते थे की जेल के अंदर की सारी रिपोर्ट बाहर जाती है इससे तो आपातकाल और बढ़ जाएगा शेर के मुंह में हाथ डालना कोई बहादुरी नहीं, पहले बाहर निकलो फिर संघर्ष करो। जेल में मायूसी के साथ-साथ दिल्ली के गवर्नर के यहां रोज उनके परिवार वालों द्वारा माफी पत्र लिखकर छुटने का प्रयास होता था। सोशलिस्टों के नारे लगाने पर यहां तक आरोप लगाते थे कि उनके तो जेल में मजे आ रहे हैं, इनके आगे पीछे कोई है नहीं इनका कोई व्यापार नहीं, हमारा तो व्यापार चौपट हो रहा है। आरएसएस संघ के कहने पर विनोबा भावे ने एक माफी नुमा मजमून तैयार किया जिसमें आपातकाल को ‘अनुशासन पर्व’ घोषित किया गया। उस परिपत्र को हिंदुस्तान की विभिन्न जेलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने प्रसारित किया तथा वहां बंदियों से उस पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया। दिल्ली की जेल में भी ऐसा पत्र आया, हमारे नेता मरहूम सांवल दास गुप्ता ने इसका कड़ा प्रतिवाद करते हुए उस परिपत्र को फाड़ दिया जनसंघ और सोशलिस्ट कार्यकर्ताओं में काफी कहा सुनी हुई। जनसंघ वालों का कहना था कि आप हस्ताक्षर न करते आपने इसको फाड़ा क्यों।
अब आज के अघोषित आपातकाल का मुलाहजा किया जाए। लोकतांत्रिक प्रक्रिया का गला घोटकर विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं को ईडी, सीबीआई अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा लालच और डर से भाजपा में शामिल किया जा रहा है। चुने हुए संसद सदस्य, विधायकों को थोक में भाजपा में शामिल कर विपक्ष की सरकारों को खत्म किया जा रहा है। प्रचार तंत्र के तमाम माध्यमों को अंबानी/ अडानी की दौलत के बल पर कब्जे में कर भाजपा के एकतरफा गुणगान का भोंपू बना दिया गया। केंद्र की प्रशासकीय सेवाओं से लेकर राज्यों की उच्च सेवाओं, विश्वविद्यालय के कुलपतियों, प्रिंसिपलों, अध्यापकों में आरएसएस के कार्यकर्ताओं की भर्ती जारी है। हिंदुस्तान की अर्जित दौलत को अंबानी अडानी को सौंपा जा रहा है। संसद में दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने के लिए विपक्ष के संसद सदस्यों को दौलत और डंडे की ताकत पर शामिल करने का अभियान जोरों पर है। हिंदू मुस्लिम संघर्ष को सरकार द्वारा योजनाबद्घ तरीके से भड़काया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा कर दी कि भाजपा का शासन निरंतर चलता ही रहेगा। भले ही जनता चुनाव में उनके विरुद्ध वोट करें,। जब तक कोई बड़ा जन आंदोलन नहीं होता मोदी राज का अघोषित आपातकाल समाप्त होता लग नहीं रहा।

