राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने रविवार को भागवत के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल शब्द मायने नहीं रखते, बल्कि काम भी दिखाई देना चाहिए, वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी भागवत के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, ‘पहला सवाल यह है कि अमेरिका में जाकर यह बोलने की जरूरत क्यों पड़ रही है? अगर भारत में हिंदू-मुसलमान का कोई मसला ही नहीं है तो यह अचानक वहां जाकर बोलने की क्या जरूरत? इसका मतलब यह है कि समस्या है. आरएसएस के मुखिया अपनी छवि बनाने के लिए ढोंग कर रहे हैं।
सिब्बल बोले- विदेश में समझदारी की बातें, घर में चुप्पी
कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भागवत के बयान को लेकर लिखा, न्यूयॉर्क में भागवत ने कहा- विविधता हमारी मूल एकता की सजावट है। इसकी रक्षा की जानी चाहिए. विदेश में समझदारी भरी बातें, लेकिन घर में चुप्पी. शब्द मायने नहीं रखते, काम बोलना चाहिए।
सिब्बल की यह प्रतिक्रिया भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए संबोधन के एक दिन बाद आई. भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और विभिन्न धर्मों के नेताओं की 6000 से अधिक लोगों की सभा को संबोधित किया था. उन्होंने कहा था कि ‘विविधता में एकता’ भारत के डीएनए का हिस्सा है।
तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने भागवत के बयान को सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा, यह वास्तव में अच्छी बात है. मोहन भागवत आरएसएस के प्रमुख हैं, जो एक हिंदू संगठन है. अगर वह दूसरे समुदायों के प्रति सहिष्णुता और दोस्ती की बात करते हैं तो यह अच्छी बात है /.
हालांकि, रॉय ने आरएसएस की विचारधारा को लेकर सवाल भी उठाए. उन्होंने कहा कि आरएसएस एक बेहद कट्टर हिंदू संगठन है. भागवत यह बात कह रहे हैं, लेकिन वह वास्तव में इस पर विश्वास करते हैं या नहीं, यह वह नहीं जानते।
उन्होंने कहा कि भागवत के बयान से भारतीय समुदाय के बीच सकारात्मक संदेश गया है. उन्होंने राजनीति में व्यक्तिगत हितों का भी मुद्दा उठाया. उनके मुताबिक बड़ी संख्या में लोग और अधिकांश राजनेता व्यक्तिगत हितों के कारण राजनीति में आते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर सत्ता में बैठे लोग जनता की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हों तो राजनीति एक बड़ी सामाजिक सेवा बन सकती है. हालांकि, उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि ज्यादातर राजनेता आम जनता और देश के हितों के बजाय अपने निजी हितों के लिए काम कर रहे हैं।
भागवत ने दिया था ‘एकता में विविधता’ का संदेश
अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम की ओर से आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में मोहन भागवत ने कहा था कि विविधता को मनाया, सम्मानित और स्वीकार किया जाना चाहिए. इसके साथ ही एकत्व की भावना को बनाए रखना जरूरी है।
भारत और अमेरिका की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका के संदर्भ में अक्सर ‘बहुलतावाद’ की बात की जाती है, जबकि भारत के संदर्भ में ‘विविधता में एकता’ की बात सामने आती है. उन्होंने कहा कि भारत के लिए एकता और विविधता दोनों उसके डीएनए का हिस्सा हैं।
भागवत बोले- भारत में मुस्लिम नहीं होने की सोच हिंदुत्व के खिलाफ
न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता और मानव समानता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह खुद भी हिंदू नहीं रहेगा. भागवत ने कहा कि हिंदू होने का अर्थ यह मानना है कि अलग-अलग रास्ते एक ही मंजिल तक पहुंचते हैं. उन्होंने कहा कि हर इंसान की अपनी गरिमा है और इंसानों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

