उत्तर प्रदेश और गुजरात में हुए सबसे अधिक मामले, शिक्षा के व्यवसायीकरण के चलते मुश्किल हुआ गरीब बच्चों का पढ़ना
चरण सिंह
देश में शिक्षा को लेकर बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं पर शिक्षा के व्यवसायीकरण के चलते गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा ग्रहण करने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फीस न जमा होने के दबाव में कितने छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर ले रहे हैं। इन मामलों का बड़ा कारण सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिरना और बंद होना है। मजबूरन गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ना पड़ता है। गरीबी के कारण फीस जमा न कर पाने के चलते ये बच्चे दम तोड़ दे रहे हैं। अभी हाल में उत्तर प्रदेश के रायबरेली में अशोक गंगवार की बेटी जो नौवीं कक्षा की छात्रा थी। इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उसके स्कूल के प्रिंसिपल ने फीस जमा न होने की वजह से उसको परीक्षा में नहीं बैठने दिया। उसके पिता के तमाम अनुरोध करने के बावजूद उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली। छात्रा पिता का अपमान बर्दाश्त न कर सकी और उसने आत्महत्या कर ली। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। पर देश और प्रदेश के कर्णधारों को क्या। उनको तो राजनीतिक रोटियां सेंकनी हैं।
उत्तर प्रदेश के ही लखनऊ में 5 जून को एक छात्र को फीस रसीद न दिखाने पर प्रैक्टिकल परीक्षा से रोक दिया गया। अपमान से आहत होकर इस छात्र ने फांसी लगाई ली।
गुजरात के सूरत में राजू खटीक की बेटी 14 वर्षीय छात्रा कक्षा 8 वीं की छात्रा थी। फीस न भरने पर स्कूल ने उसे परीक्षा में बैठने से रोक दिया। इतना ही नहीं स्कूल प्रशासन ने उसे क्लास के बाहर खड़ा कर दिया। छात्रा इस अपमान को बर्दाश्त न कर सकी और घर लौटकर उसने फांसी लगाई। मतलब ये प्राइवेट स्कूल इन बच्चों को इतना अपमानित कर देते हैं कि आहत होकर ये बच्चे अपनी जिंदगी दे दे रहे हैं।
ऐसे ही उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में 24 फरवरी कक्षा 12 के छात्र को बकाया फीस जमा न करने पर एडमिट कार्ड नहीं दिया गया। अपमान से आहत होकर छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
प्रतापगढ़ का एक और मामला 29 मार्च को घटित हुआ। कक्षा 9 की छात्रा की मात्र 800 रुपये बकाया फीस थी। फीस जमा न करने पर उसे परीक्षा से रोक दिया गया और अपमानित कर स्कूल से निकाल दिया। घर आकर छात्रा ने फांसी लगा ली।
उत्तर प्रदेश के बरेली में मार्च 2023 एक छात्रा को फीस न जमा करने पर परीक्षा देने से रोक दिया गया। तनाव में आकर छात्रा ने फांसी लगा ली।
हैदराबाद में 2021 फरवरी में कक्षा 10 की छात्रा को गरीबी के कारण फीस न भर पाने पर क्लास अटेंड करने से रोक दिया गया। छात्रा के पिता मजदूरी करते थे। दबाव में आकर छात्रा ने आत्महत्या कर ली।
देखने की बात यह है कि बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर गर्व करती है। पर ये मामले दर्शाते हैं कि योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश और पीएम मोदी के गुजरात जैसे राज्यों में ऐसी घटनाएं अधिक रिपोर्ट की गई हैं।