अभिजीत पाण्डेय
पटना । जिस स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री का बिहार की राजधानी पटना में रोड शो हो रहा है, उसी तरह बिहार बीजेपी के इतिहास में शायद पहली बार ही होगा कि पार्टी के ऐसे मेगा इवेंट में एक मोदी दिखाई नहीं दिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस मेगा इवेंट शो रोड शो में पीएम मोदी , सीएम नीतीश और बिहार बीजेपी के कई नेता भी रहे , लेकिन वो चेहरा नहीं रहा जो पिछले कई दशकों से बिहार बीजेपी की पहचान बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी नहीं शामिल हो पाये ।
पिछले चार दशकों से बिहार बीजेपी के सबसे बड़े चेहरा रहे सुशील कुमार मोदी इन दिनों कैंसर से जूझ रहे हैं। कुछ ही दिनों पहले सुशील मोदी ने खुद ही इसकी जानकारी शेयर कर बताया था कि वो इस चुनाव में सक्रिय हिस्सेदारी नहीं निभा पाएंगे।
यदि सुशील मोदी स्वस्थ रहते और कार्यक्रम में होते तो इस रोड शो का माहौल और भी शानदार होता। वो पीएम को पटना की गली-गली के माहौल और राज्य की हर राजनीतिक घटनाक्रम को आसानी से ब्रीफ कर देते। बिहार बीजेपी में अभी वैसे नेताओं की कमी है जिसका प्रदेश स्तर पर संगठन के कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ हो।
वर्तमान समय में एनडीए बिहार में नीतीश कुमार को छोड़ दे तो सुशील मोदी के कद का और उतनी जानकारी रखने वाला कोई नेता नहीं है। उन्हें हर गांव के जातिगत, धार्मिक और सामाजिक समीकरण का बेहतर ज्ञान है। उन्हें यह बेहतर तरीके से पता होता था कि कौन पार्टी में सक्रिय है, कौन सक्रिय नहीं है, कौन पार्टी के साथ काम कर रहा हैं और कौन पार्टी के खिलाफ काम कर रहा है।
बिहार की सियासत की समझ रखनेवालों का मानना है कि सुशील मोदी की सक्रियता की कमी बीजेपी को इसलिए भी अधिक खल रही है क्योंकि अभी चुनाव का समय चल रहा है। बिहार बीजेपी के नेताओं में चुनाव का बेहतर प्रबंधन जितना सुशील मोदी जानते हैं, शायद ही कोई जानता हो।

