फिजूलखर्ची के सारे रिकार्ड तोड़ दिए जनता को उपदेश देने वाले प्रधानमंत्री ने
फिजूलखर्ची के सारे रिकार्ड तोड़ दिए जनता को उपदेश देने वाले प्रधानमंत्री ने
एक महीने तक मनेगा जन्मदिन, करोड़ों और अरबों का आएगा खर्चा
गुजरात के वडनगर से वाराणसी तक निकलेगी 500 मोटरसाइकिलों की रैली
चरण सिंह
जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिजूलखर्ची के सभी रिकार्ड तोड़ दिए हैं ऐसे में उनका जन्म दिवस फिजूल दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। मोदी ने अपने कार्यकाल में सभी प्रधानमंत्रियों से अधिक फिजूलखर्ची की है। सबसे अधिक विदेशी दौरे किये हैं। सबसे अधिक पैसा अपनी ब्रांडिंग के विज्ञापन पर खर्च किया है। यह देश के दुर्भाग्य ही है कि अब जब देश में 80 करोड़ लोग फ्री के राशन पर निर्भर हैं तो प्रधानमंत्री अपने जन्मदिन पर बेतहाशा फिजूलखर्ची करने जा रहे हैं। एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रम में फिजूलखर्ची के सभी रिकार्ड टूटने जा रहे हैं।
गुजरात के वडनगर से वाराणसी तक 500 मोटरसाइकलों की रैली निकलने जा रही है। ये सभी मोटरसाइकिल नई खरीदी गई हैं। समझा जा सकता है कि इन मोटरसाइकिल के खरीदने में कितना खर्च आया होगा और कितने का पेट्रोल डलेगा ? एक महीने तक के मोदी के जन्मदिन के कार्यक्रम में करोड़ों -अरबों की फिजूलखर्ची की जाएगी। गजब हैं मोदी जी। खुद ही कहते हैं कि फिजूलखर्ची कम करो, तेल बचाओ और अब खुद के जन्मदिन पर फिजूलखर्ची का रिकार्ड टूटने जा रहा है।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76 वें जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर भाजपा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एक महीने का विशेष ‘सेवा संकल्प अभियान’ चला रही है। मुख्य कार्यक्रम और गतिविधियां सेवा दिवस और रक्तदान: 17 सितंबर को जन्मदिन की शुरुआत ‘सेवा दिवस’ के रूप में हुई, जिसमें देश भर में रक्तदान शिविर और मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं। आशीर्वाद का दीया : इस पहल के तहत परिवारों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से घरों में दीये जलाकर पीएम मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करने की अपील की गई है।
वडनगर से वाराणसी बाइक रैली : गुजरात के वडनगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संदेश देने वाली बाइक यात्रा निकाली गई है। स्वच्छता और जनसंपर्क अभियान: पूरे एक महीने तक स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार से जुड़े आयोजन किए जाएंगे। 7 अक्टूबर को मोदी जी के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के 25 साल पूरे होने पर एक और बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा। अभियान का समापन निर्वाचित प्रतिनिधियों के सम्मेलन के साथ 17 अक्टूबर को होगा।
देखने की बात है कि एक आरटीआई (RTI) रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रमोट करने या उनके विज्ञापनों पर लगभग ₹ 2,586 करोड़ खर्च किए गए हैं।विदेशी यात्राएं : संसद में साझा किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी यात्राओं पर 2015 से 2025 के बीच लगभग ₹762 करोड़ खर्च हुए हैं। सरकार का कहना है कि इन दौरों से वैश्विक साझेदारियां मजबूत हुई हैं और देश में निवेश बढ़ा है, वहीं विपक्ष और आलोचकों का तर्क है कि इस पर होने वाला भारी-भरकम खर्च कई बार जनहित के मुकाबले भव्यता और प्रचार पर केंद्रित होता है।
मई 2026 में प्रधानमंत्री द्वारा सरकारी खर्चों में मितव्ययिता बरतने और गैर-जरूरी खर्चों को कम करने की अपील पर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आईं। प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने इन अपीलों को सरकार की आर्थिक नाकामियों का नतीजा बताया और कहा कि जनता से त्याग की उम्मीद करने के बजाय सरकार को खुद अपनी प्रशासनिक फिजूलखर्ची पर लगाम लगानी चाहिए। पीएम ने अपील की कि खर्च बंद मत करिए पर फिजूलखर्ची रोकिये।

