Site icon Thenews15.in

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष की हर तिथि का अलग है महत्व

Pitru Paksha dates: पितृपक्ष में यदि पितरों के निमित्त तिथियों का ध्यान रखा जाए तो श्राद्ध कर्ता के सभी मनोरथ पूरे होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, तिथि अनुसार किए गए श्राद्ध का फल भी अलग-अलग होता है। पितृपक्ष या महालया की विभिन्न तिथियों में श्राद्ध-कर्म पूर्णिमा एवं आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से प्रारंभ होकर आश्विन अमावस्या को पूर्ण होता है। इस अवधि में मनुष्य पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए अपने-अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। शास्त्रानुसार तिथि अनुसार किए गए श्राद्ध का फल भी अलग-अलग होता है, जो इस प्रकार है। पूर्णिमा – जो व्यक्ति पूर्णिमा को श्राद्ध करते हैं, उनकी बुद्धि, बल, पौरुष, पुत्र-पौत्रादि, धन, ऐश्वर्य में वृद्धि होती है और वह चिरकाल तक सुखों का उपभोग करता है।

द्वितीया – जो व्यक्ति अपने पितरों का श्राद्ध द्वितीया को करते हैं, उन्हें राजा के तुल्य ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

तृतीया – इस दिन श्राद्ध किया जाता है तो श्राद्धकर्ता के समस्त कष्टों, दुखों और शत्रुओं का शमन होता है और वह अक्षय धन को प्राप्त करता है।

चतुर्थी – जो लोग चतुर्थी को श्राद्ध करते हैं, उनका चतुर्मुखी विकास होता है। पितर उनसे प्रसन्न होकर उनके अभीष्ट की सिद्धि करते हैं।

पंचमी – पंचमी को किया गया श्राद्ध अकूत धन संपत्ति और स्वर्ग की प्राप्ति कराता है।

षष्ठी – इस दिन श्राद्ध से देवगण की गई पूजा सहर्ष स्वीकार करते हैं।

सप्तमी – जो सप्तमी तिथि को श्राद्ध कर्म करते हैं, उन्हें अनेक महान यज्ञों के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

अष्टमी – इस दिन श्राद्ध करने से समस्त सिद्धियों और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

नवमी – जो व्यक्ति नवमी को श्राद्ध कर्म करते हैं, वे मनोनुकूल आचरण करने वाली पत्नी प्राप्त करते हैं। समस्त स्त्रियों का श्राद्ध इसी दिन किए जाने का विधान है।

दशमी – इस दिन श्राद्ध करने वाला व्यक्ति ब्रह्मत्व तथा स्थिर लक्ष्मी को प्राप्त करता है।

एकादशी – एकादशी को श्राद्ध करने वाले मनुष्य के समस्त पाप कर्मों का शमन हो जाता है। उसे वेद, उपनिषदों का ज्ञान प्राप्त होता है और भगवान विष्णु का सान्निध्य प्राप्त होता है।

द्वादशी – द्वादशी को श्राद्ध करने वाला मनुष्य प्रचुर अन्न धन को प्राप्त करता है। दानादि श्रेष्ठ कर्म उसके द्वारा संपन्न किए जाते हैं।

त्रयोदशी – जो त्रयोदशी को श्राद्ध कर्म करते हैं, उन्हें विलक्षण बुद्धि, अच्छी संतति, दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

चतुर्दशी – इस दिन श्राद्ध कर्म करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त लोगों को शांति मिलती है।

अमावस्या – इस दिन भूली-बिसरी तिथि वालों और जुड़वा लोगों का श्राद्ध किया जाता है, इससे पितरों असीम आशीर्वाद मिलता है।

Exit mobile version