चरण सिंह
संसद की एक दिन की कार्यवाही में छह करोड़ का खर्चा आता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक सत्र में जनता की जेब से कितना पैसा जाता है। जहां तक काम की बात है तो किसी भी सत्र की समीक्षा कर लीजिये आरोप प्रत्यारोप बस। हर सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही बेकार के मुद्दों पर समय बर्बाद कर देते हैं। मीडिया भी नेताओं के पहनावे और बेकार के भाषणों की समीक्षा करने में लग जाता है।
वंदेमातरम पर 10 घंटे बहस हुई पर इंडिगो फ्लाइट कैंसिल होने से यात्रियों को कितनी परेशानी हुई ? गोवा नाइट क्लब में 26 लोग कैसे जिंदा जल गए। ;लूथरा ब्रदर्स थाईलैंड कैसे भाग गए। डॉलर की कीमत 90 रुपए कैसे पहुंच गई। किसी को कोई मतलब नहीं। सरकारी नौकरी तो भूल ही जाओ निजी संस्थाओं में भी बुरा हाल है। या तो नौकरी है ही नहीं। यदि है तो जमकर शोषण। समझने की बात यह है कि इंडिगो फ्लाइट्स कैंसिल ही इसलिए हुई क्योंकि वहां पर पायलट का जमकर शोषण किया जा रहा था। 12 घंटे काम लिया जा रहा था।
समझ लीजिये कि पायलट और यात्रियों की जिंदगी से कितना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा था पर लोगों को क्या ? उनको तो जाति और धर्म से फुर्सत मिले तब न। पीएम मोदी फ्री राशन दे तो रहे हैं। पहलगाम में आतंकियों ने 27 लोगों को गोलियों से भून दिया। एयर इंडिया फ्लाइट में 250 लोग जिंदा जल गए। किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। जिनके गए उनको पड़े। देश में यदि सबसे कम कीमत है तो वह आदमी की जिंदगी की है। लोगों को इससे क्या ? उन्हें चिंता है तो अपने नेता और अपनी पार्टी की। बच्चों के लिए है तो मंदिर और मस्जिद।
देश में रोजगार नहीं है। किसी पर कोई असर नहीं। महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। किसी को कोई मतलब नहीं। नए नए बच्चों का हार्ट अटैक हो रहा है। सुसाइड कर रहे हैं। शिक्षा, चिकित्सा और दूसरे क्षेत्र धंधा बनकर रह गए हैं। किसी को क्या मतलब ? सरकार हर मोर्चे पर विफल पर इनकी नजरों में देश मजबूत हाथों में है। हां विपक्ष की कमजोरी के चलते सरकार की खामियों को उजागर नहीं किया जा रहा है पर अपना विवेक का तो इस्तेमाल करो।

